डियर डोनल्ड तुम्हारा, उड़ता उड़ेंद्र – Nitin Thakur

डियर डोनल्ड, जब ये खत तुम्हें मिलेगा तब मैं शायद नीदरलैंड्स के प्रधानमंत्री रूट के गले पड़ रहा हूंगा…. वो.. मेरा मतलब.. गले लग रहा हूंगा। भले ही मैं अमेरिका से निकलकर अब समंदर के ऊपर हवा में हूं लेकिन मेरा दिल वहीं व्हाइट हाउस के किसी कोने में ठहर गया है। कितना सुखद था…

गांधी, चार्ली, चर्चिल और मशीन -3 (Nitin Thakur)

1931 में जब चार्ली चैप्लिन गांधी से मिल रहे थे तब उन्हें बाज़ार में बढ़ते मशीनीकरण के नुकसानों का उतना अंदाज़ा नहीं था। दुनिया बहुत तेज़ी के साथ मशीनों पर निर्भर होती जा रही थी। पहले विश्वयुद्ध के बाद बर्बाद हुए देश तेज़ी से खड़े होने के लिए मशीनों पर सवार थे और जर्मनी उनमें…

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एक बच्चा जिसे सब भूल जाते हैं- प्रदीप

  एक गड्ढा है जिसमें वह गिर गया है और उसके साथ जो आया है, वह रुकता नहीं उसके लिए. जैसे कई बार आपके सपने में होता होगा, आप गिरते चले जाते होंगे कहीं गहरे और चीख़ते होंगे लेकिन आवाज़…! वह तो अंदर ही कहीं गोल घूम कर रह गयी है. या फिर आपके जीवन…

आज देश किस आधार पर मान ले कि सीबीआई प्रधानमंत्री का तोता नहीं है? – Nitin Thakur

एनडीटीवी प्रमोटर पर छापे के दौरान ज़ी अजीब सी खुशी के साथ खबर चला रहा था. शायद उन्हें इस बात की शिकायत है कि जब उनकी इज्ज़त का जनाज़ा निकल रहा था तब उनका साथ किसी ने नहीं दिया. ज़ी का दर्द एक हद तक सही भी है. तब सभी ने चौधरी और अहलूवालिया का…

Introducing #चचा_चक्रम और भगत

भगत – सही किया साले एनडीटीवी को पेल कर, बहुत एंटी मोदी हो रिया था!   चचा चक्रम – हां, रविशवा पापुलर भी बहुत हो गया है…निधि राजदान ने विलम्बित मात्रा को खदेड़ दिया…बहुत थूथू हो रई है मोदी और भगतों की…   भगत – हुंह, देखता ही कौन है एनडीटीवी…   चचा चक्रम –…

हम सब अभिशप्त हैं, क्योंकि हम देख और महसूस कर पाते हैं – Mayank Saxena

आप वो समाज हैं, जो बाबरी गिरने के बाद घरों की छतों पर खड़े हो कर थालियां पीट रहे थे..घंटे-घड़ियाल बजा रहे थे…रात को मशाल ले कर विजय जुलूस निकाल रहे थे…दीए जला रहे थे… आप वह समाज हैं, जो गुजरात के निर्मम जनसंहार में हज़ार लोगों के बेरहम क़त्ल को गोधरा को लेकर तर्कसंगत…

जब अंग्रेज़ देश छोड़कर जा रहे थे तब आरएसएस कबड्डी खेलनेवाले हिंदू लड़कों के गिरोह से ज़्यादा कुछ नहीं था – Nitin Thakur

जब अंग्रेज़ देश छोड़कर जा रहे थे तब आरएसएस कबड्डी खेलनेवाले हिंदू लड़कों के गिरोह से बहुत ज़्यादा कुछ नहीं था। खेल के बहाने उनमें हिंदू पहचान का इंजेक्शन भरा जा रहा था। घर वाले संस्कार पढ़ाने और सेहत बनाने के लिए बच्चों को शाखा भेजते रहे और वही बच्चे वापसी में ‘कुछ अधिक हिंदू’…