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Sanjeev Bhatt’s wife writes on her husband’s life imprisonment sentence

Shweta Sanjiv Bhatt writes says the following on her husband Sanjiv Bhatt’s life imprisonment sentence- The sessions court today sentenced Sanjiv to Life Imprisonment for a crime he did not commit. To all of you who have stood by Sanjiv as his pillar of support – Your words of support are comforting and encouraging, but words without action will amount to nothing. your support will … Continue reading Sanjeev Bhatt’s wife writes on her husband’s life imprisonment sentence

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Hillele report: Times of India कि लोकतंत्र के ख़िलाफ़ ‘सुपारी पत्रकारिता’

#TimesofIndia #SoniaGandhi #AssetsofCongress टाइम्स ऑफ इंडिया, लखनऊ संस्करण में एक विशेष पन्ना, चौथे पेज पर ‘Dance of Democracy’ और उस पर बिग बॉटम में (तस्वीर में देखें) ये ख़बर, जो बता रही है कि ‘पिछले 5 सालों में सोनिया गांधी की सम्पत्ति 21 फीसदी बढ़ी, जिसमें इटली में उनकी पारिवारिक सम्पत्ति में हिस्सा भी शामिल है।’ इस ख़बर में लिखा गया था कि सोनिया की … Continue reading Hillele report: Times of India कि लोकतंत्र के ख़िलाफ़ ‘सुपारी पत्रकारिता’

The Final Solution – A Film on Gujarat Genocide

Final Solution is a study of the politics of hate. Set in Gujarat during the period Feb/March 2002 – July 2003, the film graphically documents the changing face of right-wing politics in India through a study of the 2002 genocide of Muslims in Gujarat. It specifically examines political tendencies reminiscent of the Nazi Germany of early/mid-1930s. Final Solution is anti-hate/ violence as those who forget … Continue reading The Final Solution – A Film on Gujarat Genocide

Important: Assam NRC- a humanitarian crisis looming large

“Citizenship is man’s basic right for it is nothing less than the right to have rights. Remove this priceless possession and there remains a stateless person, disgraced and degraded in the eyes of his countrymen”, once said Earl Warren, a prominent jurist. His words rightly sum up the fate of millions of residents in Assam whose names are excluded from the draft list of National … Continue reading Important: Assam NRC- a humanitarian crisis looming large

वो तय करेंगे- आप संदिग्ध हैं, देशद्रोही हैं-मसीहुद्दीन संजरी

लोकसभा चुनावों में 23 मई 2019 को भाजपा की प्रचंड जीत का एलान हुआ। आतंक की आरोपी साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर को भाजपा ने भोपाल सेअपना प्रत्याशी बनाया जिन्होंने कांग्रेस के  नेता दिग्विजय सिंह को भारी मतों से पराजित कर कानून बनाने वाली देश की सबसे बड़ीपंचायत में पदार्पण किया। मोदी के दोबारा सत्ता में आने के साथ ही सरकार आतंकवाद पर ‘सख्त’ हो गयी। पहले से ही दुरूपयोग के लिए विवादोंमें रहे पोटा कानून के स्थान पर कांग्रेस सरकार ने 2004 में नए रूप में गैरकानूनी गतिविधियां (निरोधक) अधिनियम पेश किया था। प्रधानमंत्रीनरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में कैबिनेट की बैठक में इसी में दो और संशोधन लाने का फैसला किया गया। खबरों के अनुसार पहला संशोधन किसीव्यक्ति को आतंकवादी घोषित करने के लिए उसके किसी संगठन से जुड़े होने की बाध्यता को समाप्त करता है और दूसरा एनआईए को किसी भी व्यक्ति को आतंकी होने के संदेह पर गिरफ्तार करने की शक्ति प्रदान करता है।  गिरफ्तार किए गए व्यक्ति को तभी ज़मानत मिल सकती है जब वह खुद को अदालत में बेगुनाह साबित कर दे। अब तक एनआईए को किसी व्यक्ति को आतंकवादी साबित करने के लिए तमाम अन्य साक्ष्यों केअलावा उसके किसी आतंकी संगठन से जुड़ाव के सबूत भी अदालत को देने होते थे लेकिन अब उसे इस जंजाल से मुक्त कर दिया जाएगा। राजनीतिक उद्देश्यों और राजनेताओं के खिलाफ पोटा के दुरूपयोग के आरोपों के चलते 2004 में पोटा को खत्म कर 1967 में बने यूएपीए मेंआतंकवाद से सम्बंधित प्रावधानों को शामिल कर उसे नया रूप दिया गया था। शुरू में यूएपीए में शामिल आतंकवाद सम्बंधित पोटा के तीन कठोरप्रावधानों को शिथिल या खत्म कर दिया गया था। पोटा के अंतर्गत शामिल ज़मानत पाने के कड़े प्रावधानों को निकाल दिया गया था।  पंद्रह दिनोंकी पुलिस हिरासत को हटा दिया गया था और पुलिस के सामने दिए गए बयान के अदालत में स्वीकार्य होने की बाध्यता खत्म कर दी गई थी।लेकिन बाद में होने वालो संशोधनों में इनमें से दो प्रावधानों को फिर से और कठोर बना दिया गया।  पुलिस के सामने दिए गए बयान अब भीअदालतों में स्वीकार्य नहीं हैं लेकिन साथ में आरोपों को गलत साबित करने का बोझ कैद में जा चुके आरोपी पर होने और ज़मानत कीसंभावनाओं के खत्म हो जाने के बाद इस अस्वीकार्यता के बहुत मायने नहीं रह जाते। प्रस्तावित संशोधन में आतंकवाद पर प्रहार की बात की गईहै। हालांकि सच यह भी है कि यूएपीए के प्रावधानों का प्रयोग असहमति के स्वरों को कुचलने के लिए भी किया जाता रहा है। गत वर्ष दिल्लीऔर मुम्बई से अर्बन नक्सल के नाम पर प्रतिष्ठित सामाजिक कार्यकर्ताओं, पत्रकारों, कवियों, शिक्षक और वकीलों की गिरफ्तारियां इसी की ताजा कड़ी है। नए संशोधन के बाद आतंकवाद, … Continue reading वो तय करेंगे- आप संदिग्ध हैं, देशद्रोही हैं-मसीहुद्दीन संजरी