अबे तेरी तो

वैसे तो मुझे भारत और पाकिस्तान के संबंधों में कई बातें समझ में नहीं आती, लेकिन यह बात बिल्कुल समझ में नहीं आती कि अचानक बैठे बिठाए बात प्यार, मुहब्बत और शांति से शुरु होते होते गाली-गलौज में कैसे बदल जाती है. भारत– हम पाकिस्तान में लोकतंत्र की स्थिरता चाहते हैं. एक मज़बूत पाकिस्तान भारत सहित पूरे दक्षिण एशिया के हित में है. पाकिस्तान– हम … Continue reading अबे तेरी तो

क्या फ़र्क पड़ता है कि राहुल का नाम मोदी नहीं: वुसतुल्लाह ख़ान

आज के भारत में ये बिल्कुल ज़रूरी नहीं है कि किसी मस्जिद के सामने सुअर का सिर काट कर डाल दिया जाए या मंदिर के सामने कोई जुलूस रुक कर अल्लाह हो अकबर के नारे लगाए. अब तो सिर्फ़ दो मोटरसाइकिलों का आपस में टकराना या दूसरी बिरादरी की लड़की छेड़ने का आरोप ही 43 लाशें गिराने, 100 से ज्यादा को घायल करने और 50,000 … Continue reading क्या फ़र्क पड़ता है कि राहुल का नाम मोदी नहीं: वुसतुल्लाह ख़ान

नाउम्मीदी के बीच उम्मीद की एक किरण: वुस्तुल्लाह ख़ान

जब जूते ख़रीदने के भी पैसे न हों और कोई हाशिम ख़ान स्क्वॉश के मैदान पर झंडे गाड़ दे और फिर अगले 52 वर्षों तक उनका परिवार यह झंडा न गिरने दे. जब करोड़ो महिलाएँ अभी केवल सपने में ही विमान उड़ाने का जोखिम कर सकें और कोई शुक्रिया ख़ानम विमान उड़ाने लगे और वह भी आज से 53 वर्ष पहले. जब 80 प्रतिशत महिलाएँ … Continue reading नाउम्मीदी के बीच उम्मीद की एक किरण: वुस्तुल्लाह ख़ान

हिन्दुस्तान-पाकिस्तान ने सच और झूठ को भी आधा-आधा बाँट लिया: वुस्तुल्लाह खान

  मुझे एक रिटायर्ड जनरल ने एक वाक़या सुनाया कि अगस्त 1947 में देहरादून एकेडमी में अचानक यह आदेश आया कि कैडेट फैसला कर लें कि वे भारतीय सेना में रहेंगे या पाकिस्तानी फ़ौज का हिस्सा बनेंगे. मुसलमान कैडेट्स को बताया गया कि उनके लिए पाकिस्तान जाना ज़्यादा उचित रहेगा. उसके बाद उनकी रवानगी के लिए व्यवस्था शुरू होगी. फिर आदेश आया कि देहरादून की … Continue reading हिन्दुस्तान-पाकिस्तान ने सच और झूठ को भी आधा-आधा बाँट लिया: वुस्तुल्लाह खान

झंडा और डंडा: वुसतुल्लाह खान

  क्या आपने तिरंगा ग़ौर से देखा है, ज़रूर देखा होगा. लेकिन कभी आप ने ये सोचने की तकलीफ़ उठाई कि कपड़े के तीन विभिन्न पट्टियों को क्यों जोड़ा गया था और फिर बीच में अशोक चक्र क्यों बना दिया गया. जब पिंगली वेंकैया साहेब ने ये तिरंगा डिज़ाइन किया तो उन्होंने नारंगी पट्टी यह सोचकर ड्राइंग बोर्ड पर बिछाई होगी कि भारत का हर … Continue reading झंडा और डंडा: वुसतुल्लाह खान