सबने साथ-साथ खायी खिचड़ी. खान-पान के नाम पर भेद भाव के खिलाफ हम सब एक हैं

Lucknow   लखनऊ 14 जनवरी 2018. मकर संक्रांति के अवसर पर इंसानी बिरादरी, शोल्डर टू शोल्डर, आवाम मूवमेंट और मुस्लिम वेलफेयर सोसायटी ने इंदिरा नगर सेक्टर सी में सबके साथ खिचड़ी का आयोजन किया. इंदिरानगर, मुंशी पुलिया व आस-पास के क्षेत्र वासियों समेत विभिन्न सामजिक-राजनीतिक संगठनों के लोगों ने साथ-साथ खिचड़ी खाई. शामिल लोगो ने कहा कि पूरे दुनिया में भारतीय समाज अपनी अनेकता में … Continue reading सबने साथ-साथ खायी खिचड़ी. खान-पान के नाम पर भेद भाव के खिलाफ हम सब एक हैं

हज हाउस की दिवार को भगवा रंग में रंगना योगी सरकार के मानसिक दिवालियापन को दिखाता है

हज हाउस की दिवार को भगवा रंग में रंगना योगी सरकार के मानसिक दिवालियापन को दिखाता है- रिहाई मंच कानून व्यवस्था पर विफल सरकार फर्जी मुठभेड़ों से ठोक रही है अपनी पीठ लखनऊ 5 जनवरी 2018। रिहाई मंच ने लखनऊ स्थित उत्तर प्रदेश हज हाउस की दिवार का रंग भगवा रंग से रंग देने को योगी सरकार की मानसिक दिवालियापन करार दिया है। मंच ने … Continue reading हज हाउस की दिवार को भगवा रंग में रंगना योगी सरकार के मानसिक दिवालियापन को दिखाता है

विधानसभा चुनाव – नोटबंदी, अखिलेश और केजरीवाल! – QW Naqvi

अबकी बार, तीन सवाल! नोटबंदी, अखिलेश और केजरीवाल. चुनाव तो होते ही रहते हैं, लेकिन कुछ चुनाव सिर्फ़ चुनाव नहीं होते, वह समय के ऐसे मोड़ पर होते हैं, जो समय का नया लेखा लिख जाते हैं, ख़ुद बोल कर समय के कुछ बड़े इशारे कर जाते हैं, कुछ सवालों की पोटलियाँ खोल जाते हैं. जो पढ़ना चाहे, पढ़ ले, सीख ले, समझ ले, आगे … Continue reading विधानसभा चुनाव – नोटबंदी, अखिलेश और केजरीवाल! – QW Naqvi

My First Roza was in a Durga Pooja Pandal: Amir Rizvi

I don’t remember when I started praying and keeping my Rozas ( the fast during Ramzan). Every child starts aping their parents and I guess I used to do the same. During Ramzan as kids we had the half ticket concept, either fast for half a day “aadhe din ka roza” or the more popular was “aadhe mooh ka roza”: we were allowed to eat … Continue reading My First Roza was in a Durga Pooja Pandal: Amir Rizvi

‘अपने वाले’ या ‘अपने भाई जात ‘ क्या होता है ? Mithun Prajapati

मैं अक्सर लोगों के मुंह से कहते हुए सुनता हूँ ,आप तो अपने वाले हो। या कभी-कभी कोई पूछ लेता है , आप अपने भाई जात नहीं हो ? शुरुआत में तो मैं सोच में पड़ जाता की ये ‘अपने वाले’ या ‘अपने भाई जात ‘ क्या होता है।लोगों के इस प्रश्न का क्या जवाब हो सकता है की आप अपने वाले हो ! बचपन … Continue reading ‘अपने वाले’ या ‘अपने भाई जात ‘ क्या होता है ? Mithun Prajapati

A Brief Story of Shuklaji and Rameez’s Namaaz-e-Jumma

26/Aug/2016, 1:40pm: I hurriedly went down from office to catch an auto-rickshaw to reach Masjid for the Friday congregational prayer (“Namaaz-e-Jumma’h”). As soon as I sat in the auto I realised that I had forgotten my wallet in my office in the rush. I requested the auto guy to drop me at the Masjid and wait till I pray (for 15-20 minutes) and drop me … Continue reading A Brief Story of Shuklaji and Rameez’s Namaaz-e-Jumma

“Paavam, kozhandhai, let her touch and play” – Benazir

When I was 8 or 9 years old, one of my neighbours took to me to the house of another neighbor during navratri when brahmin households keep golu (figurines arranged over a step-like apparatus). The hosts were traditional brahmins who lived in a grand house, the uncle – who would have been around 50 then, was tall, dignified with a booming voice and his wife … Continue reading “Paavam, kozhandhai, let her touch and play” – Benazir