रवीश बड़े नहीं ये वक्त बहुत छोटा है- Rakesh Kayasth

  बड़ी शख्सियतों की परछाइयों तक से मुझे  डर लगता है या खुलकर कहूं तो एलर्जी है। अनगिनत नामचीन लोगो से टकराने के बावजूद कभी निजी पीआर में नहीं पड़ा। मेरे व्यकित्व की अपनी सीमाएं, मेरा इगो, आप जो भी मानें। ऐसे में मुझे अपने किसी समकालीन या हमपेशा आदमी पर लेख लिखना पड़े तो ये वाकई बहुत कष्टप्रद है। कष्ट के साथ थोड़ी सी … Continue reading रवीश बड़े नहीं ये वक्त बहुत छोटा है- Rakesh Kayasth

External link to “NDTV India This Week”- A Look @ the stories before I & B recommended 1 day ban!

“NDTV India This Week”- A Look @ the stories before I & B recommended 1 day ban!

What did NDTV India report this week? The Information and Broadcasting ministry, according to PTI, will now ask the channel NDTV India to be taken off air for a day on the 9th of November. The I & B Ministry’s decision would be  the first ever order against a broadcaster over its coverage of terrorist attacks. We at Hillele.org looked at the stories NDTV India … Continue reading “NDTV India This Week”- A Look @ the stories before I & B recommended 1 day ban!

लक्ष्मी आई है, बधाई हो – Ravish Kumar

लक्ष्मी आई है, बधाई हो पता नहीं क्यों इस बार अच्छा नहीं लगा। जब भी किसी ने कहा कि लक्ष्मी आई है तो मन उदास हो गया। समझने की कोशिश कर रहा था कि क्यों कहा जा रहा है? बेटी आई है। लक्ष्मी कैसे आ गई? क्या ये सात्वंना में कहा जा रहा है? बेटा आता है तो क्या कहा जाता है? बेटा लक्ष्मी है … Continue reading लक्ष्मी आई है, बधाई हो – Ravish Kumar

जेल के नाम रवीश कुमार का एक प्रेम पत्र

प्रिय जेल, चौंक गई ! क्या जेल को प्रिय नहीं पुकारा जा सकता । जब हम प्रेम में गिरफ़्तार हो सकते हैं तो जेल से प्रेम क्यों नहीं कर सकते । लोगों ने जेल से किताबें लिखीं, जेल में रहते हुए पुत्री के नाम पत्र लिखे लेकिन किसी ने जेल को पत्र नहीं लिखा । दुनिया में जेल को प्रिय पुकारने वाला प्रथम पुरुष मैं … Continue reading जेल के नाम रवीश कुमार का एक प्रेम पत्र

मेरे सवाल आप से हैं, आप चुप क्यों हैं? – आपके नाम रवीश की चिट्ठी

फासीवाद की खासियत है कि हर विरोध करने वाले को ही नहीं, हर तर्क करने वाले को ख़तरा समझा जाता है। उसका दमन होता है और इसकी शुरुआत धमकी, गाली-गलौज और फिर मिथ्या प्रचार या छवि खराब करने से होती है। फासीवादी शासक जानते हैं कि छवि खराब करना, हत्या करने से ज़्यादा प्रभावी और आसान तरीका है। लम्बे समय से टीवी पत्रकार रवीश कुमार … Continue reading मेरे सवाल आप से हैं, आप चुप क्यों हैं? – आपके नाम रवीश की चिट्ठी