जिन्हे नाज है हिंद पर वो कहां हैं? – Rakesh Kayasth

  आधुनिक विश्व की सबसे बड़ी मानवीय त्रासदी यानी भारत विभाजन के दो साल पूरे हो चुके थे। दिल्ली में नफरत की आग अब लगभग ठंडी पड़ चुकी थी। उधर भगत सिंह का शहर लाहौर बाकी रंगों के मिटाये जाने और सिर से पांव तक हरे रंग में रंगे जाने के बाद एकदम बदरंग हो चुका था। ऐसे में लाहौर में रहने वाले एक नौजवान … Continue reading जिन्हे नाज है हिंद पर वो कहां हैं? – Rakesh Kayasth

हमारे लिए बस संविधान, भारत माता बचायें आपकी जान – Rakesh Kayasth

  देश की सबसे पवित्र किताब यहां का संविधान है। यह किताब इसलिए पवित्र है क्योंकि यह हमें इस बात की आज़ादी देती है कि हम गीता, कुरान, बाइबिल या गुरु ग्रंथ साहिब जैसी अनेक किताबों में से जिसे चाहें, उसे पवित्रतम माने। हम अपनी धार्मिक किताबों के तथाकथित सम्मान के लिए आये दिन सड़क पर लाठी, तलवार और त्रिशूल भांजते रहते हैं। लेकिन क्या … Continue reading हमारे लिए बस संविधान, भारत माता बचायें आपकी जान – Rakesh Kayasth

68 साल का मुल्क, 18 साल का नौजवान होता है – राकेश कायस्थ

मुल्क की जिंदगी में 68वें साल की कुछ वैसी ही अहमियत है, जैसे किसी नौजवान की जिंदगी में 18 वें साल की। गिरता-संभलता, लखड़खडाता और लड़कपन की गलतियों को भुलाता भारत अपने अनगिनत सपनों के साथ नई मंजिल की तरफ बढ़ने को बेताब है। ये सच है कि देश हमेशा व्यक्ति से बड़ा होता है। लेकिन ये भी सच है कि व्यक्ति के बिना देश … Continue reading 68 साल का मुल्क, 18 साल का नौजवान होता है – राकेश कायस्थ