तुम अगर वोट देने का वादा करो

तुम अगर वोट देने का वादा करो  मैं यूं ही मस्त जुमले सुनाता रहूं ।  तुम मुझे देखकर सिर हिलाते रहो  मैं तुम्हें देखकर बड़बड़ाता रहूं ।मैंने हाँकी हैं गप्पे हजारों मगर इक शिकन तेरे माथे पे आई नहीँ ।  बेच डाला है मैंने सुनहरा वतनएक उंगली भी तुमने उठाई नहीँ ॥  तुम अगर अपनी गर्दन झुकाए रहो मैं छुरी पीठ पीछे चलाता रहूं ॥कोई हिन्दू मुसलमां … Continue reading तुम अगर वोट देने का वादा करो

यदि देश की सुरक्षा यही होती है-पाश #NOCAA

यदि देश की सुरक्षा यही होती हैकि बिना जमीर होना ज़िन्दगी के लिए शर्त बन जाएआँख की पुतली में हाँ के सिवाय कोई भी शब्दअश्लील होऔर मन बदकार पलों के सामने दण्डवत झुका रहेतो हमें देश की सुरक्षा से ख़तरा है । हम तो देश को समझे थे घर-जैसी पवित्र चीज़जिसमें उमस नहीं होतीआदमी बरसते मेंह की गूँज की तरह गलियों में बहता हैगेहूँ की … Continue reading यदि देश की सुरक्षा यही होती है-पाश #NOCAA

PROTEST – Ella Wheeler Wilcox

To sin by silence, when we should protest, Makes cowards out of men. The human race Has climbed on protest. Had no voice been raised Against injustice, ignorance, and lust, The inquisition yet would serve the law, And guillotines decide our least disputes. The few who dare, must speak and speak again To right the wrongs of many. Speech, thank God, No vested power in … Continue reading PROTEST – Ella Wheeler Wilcox

पचास दिन पचास रात – बोधिसत्व

  यह बड़ी पुरानी बात है कोसल का एक राजा था एक दिन राजा ने उद्बोधन किया … प्रिय प्रजाजनों प्रिय संत जनों राष्ट्र हित में बस पचास दिन और पचास रात जो देता हूँ वह दुख सहन करो वह राजा था इसलिए उद्बोधन कर सकता था दुख सुख सब कुछ दे सकता था भक्त प्रजा ने भजन किया बस पचास दिन और पचास रात … Continue reading पचास दिन पचास रात – बोधिसत्व

आर्यवर्त की सजग सरकार-बोधिसत्व

  तभी अचानक सावन के दिव्य महीने में सर्वथा नूतन सरकार ने … एक नया नवेला नियम बनाया घर में दफ्तर में बाजार में रात दिन दोपहर मे नदी नाले नहर में डूब कर या खा कर जहर जो जान गवांएगा ऐसा आत्म हत्यारा देश के लिए शहीद माना जाएगा ऐसे आत्म बलिदानियों की भव्य समाधि बनेगी नगर चौक पर मूर्ति बिठाई जाएगी जन कवियों … Continue reading आर्यवर्त की सजग सरकार-बोधिसत्व

बंदरों के हाथ में उस्तरे का दौर है – Pankaj Dubey

सड़कों पर खामोशी बैंकों में शोर है रातें हैं लंबी जाने कहां भोर है डिजिटल के नाम पर नकदी ले गया चोर है बंदरों के हाथ में उस्तरे का दौर है Continue reading बंदरों के हाथ में उस्तरे का दौर है – Pankaj Dubey

देशहित कोई अदृश्य देवता है – Charu Mishra

  देशहित कोई अदृश्य देवता है जिसके लिए जन जन को अपना खून पसीना बहा देना चाहिए। अपनी भूख प्यास और बीमारी भूल जानी चाहिए। आदिवासियों और किसानों को इसकी पूजा में अपनी ज़मीने अर्पित कर देनी चाहिए और सिपाहियों को अपना सुख अपनी जान छात्रो को शिक्षा का बजट और स्कॉलरशिप न्योछावर कर देनी चाहिए तो बच्चों को स्वास्थ्य सुविधाएं कर्मचारियों को बुढ़ापे का … Continue reading देशहित कोई अदृश्य देवता है – Charu Mishra