काँग्रेस+समाजवादी+वामपंथी- रामचंद्र गुहा की ‘फैंटेसी’ में छिपा भविष्य का रास्ता – Pankaj Srivastava ————————————————————–

  इलाहाबाद विश्वविद्यालय के दर्शनशास्त्र विभाग के नीम अंधेर कमरे में पहली बार यह शब्द-पद कान में पड़ा था- अमूर्त प्रत्यय ! वह बीए प्रथम वर्ष की कोई शुरुआती कक्षा थी। विज्ञान के विषयों से इंटरमीडिएट करके आने वाले मेरे जैसे छात्र के लिए इसका ठीक अर्थ समझने में कई साल लग गए। और जब थोड़ा- बहुत समझ आया तो पाया कि यह अपने किसी … Continue reading काँग्रेस+समाजवादी+वामपंथी- रामचंद्र गुहा की ‘फैंटेसी’ में छिपा भविष्य का रास्ता – Pankaj Srivastava ————————————————————–

व्हाट्सऐप के ज़हरीले इंजेक्शन का तोड़ क्या है ? – Pankaj Srivastava

होली में घर गया तो यूपी की खतरनाक स्थिति से वाक़िफ हुआ..! गाँव-गाँव ‘जियो क्रांति’ का असर है । मोबाइल पर लगातार ज़हरीले विचार और वीडियो शेयर किए जा रहे हैं। नौजवान, आईएस के गला काटने और भीड़ को गोलियों से भूनने वाले सही -ग़लत वीडियो देखने और उन्हें आगे बढ़ाने में मुब्तला हैं..उनके लिए सारे मुसलमान आईएसआईएस का झंडा उठाए हत्यारे हैं जिन्हें केवल … Continue reading व्हाट्सऐप के ज़हरीले इंजेक्शन का तोड़ क्या है ? – Pankaj Srivastava

किसी क़स्बे या शहर में मुसलमानों का बहुसंख्यक होना ग़ैरसंवैधानिक है क्या ?

By- Pankaj Srivastava कैराना का भाजपाई झूठ सामने आना कोई आश्चर्य नहीं, उसके दंगाई चरित्र का एक और प्रमाण ही है। देश की सबसे बड़ी पार्टी होने के बावजूद उसे विश्वास नहीं कि जनता उसके विकास (जिसका वह दुनिया भर में ढिंढोरा पीटती है) के काम पर विश्वास करके वोट देगी, इसके उलट वह तमाम अफ़वाहें फैलाकर हिंदुओं को मुसलमानों के ख़िलाफ़ गोलबंद करके वोट … Continue reading किसी क़स्बे या शहर में मुसलमानों का बहुसंख्यक होना ग़ैरसंवैधानिक है क्या ?

निशाने पर सहिष्णुता नहीं संविधान है ! – Pankaj Srivastava

    आमिर ने आख़िर क्या कहा, जो ऐसा हंगामा बरपा है? यही न, कि उनकी पत्नी ने हालात से तंग आकर उनसे देश छोड़ने की बात छेड़ी। कहा कि अख़बार देखकर डर लगता है। आमिर ने तो बस इसकी जानकारी दी, वह भी इसे ‘डिज़ास्टरस’ (विनाशकारी) बताते हुए । अगर दिक़्क़त है तो आमिर के नहीं उस किरण के बारे में सोचो जो उदास … Continue reading निशाने पर सहिष्णुता नहीं संविधान है ! – Pankaj Srivastava

ओ भगत सिंह दीवाने – Pankaj Srivastava

शहीद-ए-आज़म भगत सिंह के जन्मदिन समारोह की तैयारियों के बीच इंकलाबी सलाम के साथ पेश है एक गीत — ओ भगत सिंह दीवाने —————————— ओ भगत सिंह दीवाने आज़ादी के परवाने तेरा हैट चुरा के पंडे लगे पगड़ी हैं पहनाने लो अँगड़ाई एक बार फिर, करो लड़ाई पूरी क्योंकि…. ये चोरों का राज है, लुटेरों का राज है ! खून पीने वालों के सर सजा … Continue reading ओ भगत सिंह दीवाने – Pankaj Srivastava

हम अन्याय को संस्थाबद्ध करते जा रहे हैं – अरुंधति रॉय

‘कायर बुद्धिजीवियों’ का देश बन जाने का ख़तरा’ (लीजिए, हिंदी में पढ़िये अरुंधति का इंटरव्यू। गोरखपुर फ़िल्म फ़ेस्टिवल के दौरान 23 मार्च को मशहूर लेखिका अरुंधति रॉय से हुई मेरी बातचीत अंग्रेज़ी पाक्षिक “गवर्नेंस नाऊ” में छपी है। लेकिन जब लोग यह जान गये हैं कि यह साक्षात्कार हिंदी में लिया गया था तो सभी मूल ही सुनना-पढ़ना चाहते हैं। इससे साबित होता है कि … Continue reading हम अन्याय को संस्थाबद्ध करते जा रहे हैं – अरुंधति रॉय

थोड़ा चालाक बनो शाज़िया – Pankaj Srivastava

      शाज़िया इल्मी की बातचीत सुनकर हैरानू हूँ। हैरान इसलिए कि मेरी इस पुरानी साथी पत्रकार को अभी तक राजनीतिक जुमलेबाज़ी में महारत हासिल नहीं हुई। वो मुसलमानों को ‘सेक्युलर’ के बजाय ‘कम्युनल’ होने की नसीहत दे रही है बातचीत यहीं तक सुनने के बाद ज़बान से सिर्फ एक बात निकलती है– लानत है! तुमसे ना हो पाएगा शाज़िया..!! लेकिन ठहरिये…बात तो आगे भी … Continue reading थोड़ा चालाक बनो शाज़िया – Pankaj Srivastava