Undermining National Institutions to Create Regimented Minds – Irfan Engineer

The students of FTII are agitated over appointment of Gajendra Chauhan as President Chair of the Governing Council of the Institute. About 150 students pursuing various courses at the FTII are on an indefinite strike against the patent political appointment because of Chauhan’s affiliation with the BJP. When we google Chauhan, all the information we get is that he acted in films like Andaaz (2203), … Continue reading Undermining National Institutions to Create Regimented Minds – Irfan Engineer

Using And Abusing Gandhi – Ramachandra Guha

(In this article the author tries to awaken Indians to what Gandhi really was and what we should learn from him. He explains the futility of bashing the West for all our cultural and economical ailments. Instead, he wants Indians to take what is good from the West and leave the rest even citing examples of countries like Japan and Singapore who have not let … Continue reading Using And Abusing Gandhi – Ramachandra Guha

OPEN LETTER TO ARNAB GOSWAMI, EDITOR-IN-CHIEF, TIMES NOW

Dear Mr. Arnab Goswami,     We, the undersigned, who have on many occasions participated in the 9:00 p.m. News Hour programme on Times Now, anchored by you , wish to raise concerns about the shrinking space in this programme for reasoned debate and the manner in which it has been used to demonize people’s movements and civil liberties activists.   On 17th  and 18th … Continue reading OPEN LETTER TO ARNAB GOSWAMI, EDITOR-IN-CHIEF, TIMES NOW

ओ राष्ट्रवादी – Himanshu Kumar

अगर राष्ट्र ना होता तो तू भी मेरी तरह अपनी मेहनत की ही खाता मैं करता हूं मेहनत पर तिजोरी भरती है तेरी मैं तेरी गर्दन पकड़ कर अपनी मेहनत की पूरी कीमत वसूल लेता लेकिन हमेशा पुलिस तुझे बचा लेती है अगर पुलिस ना होती फिर देखता तू कैसे अमीर बन पाता इसलिये तू पुलिस के गुणगान करता है ओ राष्ट्रवादी मेरी ज़मीन पर … Continue reading ओ राष्ट्रवादी – Himanshu Kumar

झंडा और डंडा: वुसतुल्लाह खान

  क्या आपने तिरंगा ग़ौर से देखा है, ज़रूर देखा होगा. लेकिन कभी आप ने ये सोचने की तकलीफ़ उठाई कि कपड़े के तीन विभिन्न पट्टियों को क्यों जोड़ा गया था और फिर बीच में अशोक चक्र क्यों बना दिया गया. जब पिंगली वेंकैया साहेब ने ये तिरंगा डिज़ाइन किया तो उन्होंने नारंगी पट्टी यह सोचकर ड्राइंग बोर्ड पर बिछाई होगी कि भारत का हर … Continue reading झंडा और डंडा: वुसतुल्लाह खान

और आप कहेंगे सिपाहियों से कि ये कपडा ही राष्ट्र है – Himanshu Kumar

आपने एक ज़मीन के टुकड़े की एक सीमा बनाई उस ज़मीन के टुकड़े को राष्ट्र कहा इसमें रहने वाले सारे लोग अपने आप अब उस राष्ट्र के नागरिक हो गये अब इन सब लोगों के क्या अधिकार होंगे ?इनमे से कौन जन्म से ही सम्म्मानित माना जायेगा और कौन जन्म से ही अपमानित माना जाएगा ? कौन काट सकेगा किसके बच्चों को तलवारों को ?और … Continue reading और आप कहेंगे सिपाहियों से कि ये कपडा ही राष्ट्र है – Himanshu Kumar