दिल अपना पुराना पापी था, बरसों में नमाज़ी बन ना सका – Mubarak Ali

  मैं मुसलमान हूँ और मुझे बहुत दुख होता है जब मुस्लिम समाज जाहिलियत के नित नए कीर्तिमान स्थापित करता है. मजहब को चारदीवारी में रख कर जियो भाइयो. मेरे भारत का सामाजिक तानाबाना बड़ा नाजुक है. उसे बचाए रखने की जिम्मेदारी सिर्फ बहुसंख्यक समाज की नहीं है. सबकी है. जितनी जल्दी ये सबक हम सीख जाएं वो अच्छा. मुसलमानों की आर्थिक बदहाली पर चर्चा … Continue reading दिल अपना पुराना पापी था, बरसों में नमाज़ी बन ना सका – Mubarak Ali