प्‍यार की भाषा कहां खो गई है – Manisha Pandey

अभी कुछ दिन पहले हिंदी के कवि चंद्रकांत देवताले जी के किसी परिचित से मेरी मुलाकात हुई। उसने बताया कि देवताले जी से उसने मेरे बारे में काफी कुछ सुन रखा है और बातचीत के दौरान ही उसने एकदम से पूछ लिया, ‘जब वो वेबदुनिया में आपसे मिलने आए थे तो आपने उन्‍हें सबके सामने हग किया था न?’ ‘तुम्‍हें कैसे मालूम? वेबदुनिया वालों ने … Continue reading प्‍यार की भाषा कहां खो गई है – Manisha Pandey

The Kiss of the Spider-woman – Shaleen Rakesh

What demons hold her tongue as she dances around her girlfriends’ questions? with her arms branching out in the shadows, only her nervous laughter and soft whisper is heard is it her fear to ask, to reject, to hurt or to give? or is it just her? she is gentle kisses and soft bites but no words just shame curled up inside her gut she … Continue reading The Kiss of the Spider-woman – Shaleen Rakesh

Feminist Diary 5 – Manisha Pandey

  ना-ना। तुम क्‍या सोचते हो, मैं तुमसे बहुत नाराज हूं या तुम्‍हारे लिए दिल में अरबों टन नफरत पाले बैठी हूं। अरे, बिलकुल नहीं। बल्कि अगर मैं कहूं तो शायद तुम्‍हें यकीन न हो कि यदि मैं दुनिया में किसी की सबसे ज्‍यादा शु‍क्रगुजार हूं तो तुम्‍हारी ही। तुम्‍हीं तो हो, जिसने उस कच्‍ची उमर में इतना लतियाया कि ताउम्र के लिए मुझे तुम्‍हारी … Continue reading Feminist Diary 5 – Manisha Pandey