Bob Dylan on Winning the Nobel for Literature

Read Dylan’s speech, which was read by United States Ambassador to Sweden Azita Raji, below: Good evening, everyone. I extend my warmest greetings to the members of the Swedish Academy and to all of the other distinguished guests in attendance tonight. I’m sorry I can’t be with you in person, but please know that I am most definitely with you in spirit and honored to … Continue reading Bob Dylan on Winning the Nobel for Literature

आर्यवर्त की सजग सरकार-बोधिसत्व

  तभी अचानक सावन के दिव्य महीने में सर्वथा नूतन सरकार ने … एक नया नवेला नियम बनाया घर में दफ्तर में बाजार में रात दिन दोपहर मे नदी नाले नहर में डूब कर या खा कर जहर जो जान गवांएगा ऐसा आत्म हत्यारा देश के लिए शहीद माना जाएगा ऐसे आत्म बलिदानियों की भव्य समाधि बनेगी नगर चौक पर मूर्ति बिठाई जाएगी जन कवियों … Continue reading आर्यवर्त की सजग सरकार-बोधिसत्व

बंदरों के हाथ में उस्तरे का दौर है – Pankaj Dubey

सड़कों पर खामोशी बैंकों में शोर है रातें हैं लंबी जाने कहां भोर है डिजिटल के नाम पर नकदी ले गया चोर है बंदरों के हाथ में उस्तरे का दौर है Continue reading बंदरों के हाथ में उस्तरे का दौर है – Pankaj Dubey

ओबीसी साहित्य की विचारधारा क्या होगी? – Dilip Mandal

  वही जो तथागत गौतम बुद्ध, सम्राट अशोक, नानक, बसवन्ना, कबीर, रैदास, शिवाजी महाराज, जिजाऊ माता, संभाजी महाराज, ज्योतिबा फुले, फ़ातिमा शेख, सावित्रीबाई फुले, शाहूजी महाराज, नारायणा गुरु, बाबा साहेब भीमराव आंबेडकर, अछूतानंद, गाडगे महाराज,, अब्दुल कय्यूम अंसारी, पेरियार, ललई सिंह यादव, रामस्वरूप वर्मा, जगदेव प्रसाद, सर छोटूराम, कर्पूरी ठाकुर, बीपी मंडल की विचारधारा है। मानव श्रम की प्रतिष्ठा, किसानों, पशुपालकों, कारीगरों का सम्मान, निठल्लों … Continue reading ओबीसी साहित्य की विचारधारा क्या होगी? – Dilip Mandal

आज के समय में प्रेमचंद कि प्रासंगिकता –किशोर

  आज मुंशी प्रेमचंद की सालगिरह है और यह पोस्ट खासकर उस युवा पीढ़ी के लिए है जिसे शायद ही उनकी रचनाओं को पढने का मौका मिले और यह जरूरी है कि किसी भी हाल में उस परंपरा को जिन्दा रखना जरूरी है जो प्रेमचंद ने शुरू की थी प्रेमचंद के बारे में कुछ ऐसे तथ्य जो ज्यादा लोगों को पता नहीं है हिंदी के … Continue reading आज के समय में प्रेमचंद कि प्रासंगिकता –किशोर

सुबह सवेरे – Neelabh Ashk

सुबह सवेरे – 1 इधर कुछ दिनों से, जब से हमने लम्बी बीमारी के बाद किसी क़दर सेहतयाब होने की तरफ़ क़दम बढ़ाना शुरू किया है, हम अपने मकान के चौबारे में कुर्सी पर बैठ कर मंजन करते हैं. वक़्त चार का भी हो सकता है, इससे कुछ आगे-पीछे का भी. फिर उठ कर ज़िन्दगी के कारोबार शुरू करने के लिए हिम्मत बांधते हुए हम … Continue reading सुबह सवेरे – Neelabh Ashk

कुछ अनुभव –किशोर

    बात कक्षा 11  की है. स्कूल के समय में स्कूल  के बाहर शिकिंजी वाले के पास खड़े थे. विपिन नाम का  एक और दोस्त और  मिल गया तो गपशप शुरू हो गयी. इतने में स्कूल का गेट खुला और उसमे से हमारे प्रिंसिपल भटनागर साहब अपने स्कूटर पर  बाहर  आते दिखे .   हमने हर अध्यापक का कुछ न कुछ नाम रख रखा … Continue reading कुछ अनुभव –किशोर