बालश्रम उन्मूलन के लिए नया कानून: क्या यह हमारी स्थापित जाती व्यवस्था को बढाने का औजार नहीं है? –किशोर

इस सप्ताह बाल श्रम (प्रतिबंधन एवं विनियमन) अधिनियम,2012 राज्य सभा में पास हो गया. लोकसभा में पास होने के बाद इस कानून को अमली जामा पहनाने के लिए इसके नियम बनाये जायेंगे और यह एक कानून बन जाएगा. इस कानून में कुछ बदलाव सकारात्मक हैं जैसे इसके अंतर्गत बालश्रम रखने को एक संज्ञेय अपराध बनाया गया है तथा इसके लिए अधिक सजा और जुर्माने और … Continue reading बालश्रम उन्मूलन के लिए नया कानून: क्या यह हमारी स्थापित जाती व्यवस्था को बढाने का औजार नहीं है? –किशोर

कुछ अनुभव –किशोर

    बात कक्षा 11  की है. स्कूल के समय में स्कूल  के बाहर शिकिंजी वाले के पास खड़े थे. विपिन नाम का  एक और दोस्त और  मिल गया तो गपशप शुरू हो गयी. इतने में स्कूल का गेट खुला और उसमे से हमारे प्रिंसिपल भटनागर साहब अपने स्कूटर पर  बाहर  आते दिखे .   हमने हर अध्यापक का कुछ न कुछ नाम रख रखा … Continue reading कुछ अनुभव –किशोर

किसी झूठ को सौ बार कहने से वह सच नहीं हो जाता ! -किशोर

लेखकों, फिल्मकारों, और वैज्ञानिकों द्वारा पुरुस्कार लौटाने का गैरजरूरी विवाद अभी खत्म भी नहीं हुआ था कि भक्तों और मीडिया ने एक और विवाद खड़ा कर दिया. सबसे पहले तो मैं आमिर खान को मुबारकबाद देना चाहूँगा कि उन्होंने आज के हालात पर सोचा और उसे व्यक्त भी किया. वह चाहते तो चुप भी रह सकते थे पर उन्होंने बोला ! आज जब कुछ बोलना … Continue reading किसी झूठ को सौ बार कहने से वह सच नहीं हो जाता ! -किशोर

छदम नैतिकता और हम – किशोर

पिछले दिनों “नैतिकता” का पाठ पढ़ाने के नाम पर मुंबई पुलिस ने होटलों में छापा मारा चालीस  जोड़ो को हिरासत में लेकर उन्हें तिरस्कृत किया, कई घंटे हिरासत में रखा और जुर्माना वसूल कर के ही उन हे रिहा किया. साथ ही उन्हें अपने घरवालों को फ़ोन करने करने के लिए भी मजबूर किया गया. गौरे तलब हैं कि इन होटलों में एक भी वह … Continue reading छदम नैतिकता और हम – किशोर