बालश्रम उन्मूलन के लिए नया कानून: क्या यह हमारी स्थापित जाती व्यवस्था को बढाने का औजार नहीं है? –किशोर

इस सप्ताह बाल श्रम (प्रतिबंधन एवं विनियमन) अधिनियम,2012 राज्य सभा में पास हो गया. लोकसभा में पास होने के बाद इस कानून को अमली जामा पहनाने के लिए इसके नियम बनाये जायेंगे और यह एक कानून बन जाएगा. इस कानून में कुछ बदलाव सकारात्मक हैं जैसे इसके अंतर्गत बालश्रम रखने को एक संज्ञेय अपराध बनाया गया है तथा इसके लिए अधिक सजा और जुर्माने और … Continue reading बालश्रम उन्मूलन के लिए नया कानून: क्या यह हमारी स्थापित जाती व्यवस्था को बढाने का औजार नहीं है? –किशोर

किसी झूठ को सौ बार कहने से वह सच नहीं हो जाता ! -किशोर

लेखकों, फिल्मकारों, और वैज्ञानिकों द्वारा पुरुस्कार लौटाने का गैरजरूरी विवाद अभी खत्म भी नहीं हुआ था कि भक्तों और मीडिया ने एक और विवाद खड़ा कर दिया. सबसे पहले तो मैं आमिर खान को मुबारकबाद देना चाहूँगा कि उन्होंने आज के हालात पर सोचा और उसे व्यक्त भी किया. वह चाहते तो चुप भी रह सकते थे पर उन्होंने बोला ! आज जब कुछ बोलना … Continue reading किसी झूठ को सौ बार कहने से वह सच नहीं हो जाता ! -किशोर

इस ख़ास जीत के मायने – Kishore

आम आदमी पार्टी ने दिल्ली में 70  में से 67 सीटें जीत कर दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र में इतिहास रच दिया I आज से पहले जब कई लोग वोट देते थे तो दिमाग में रहता था कि “lets vote for lesser evil “I  “lets vote to keep fascist forces out” आदि आदि I  हम जैसे ज्ञानी लोग वोट देने को मात्र एक व्यापक रणनीती … Continue reading इस ख़ास जीत के मायने – Kishore

कमला नगर दोस्तों को एक आमंत्रण (Kishore Jha)

वर्षों पुरानी आंटे की चक्की और पहलवान की दूकान अब नहीं रहे वक़्त का अहसास कराने वाला बिड़ला मिल का सायरन भी अब नहीं बजता बिड़ला मिल की तरह गणेश मिल और न जाने कितनी मिलों पर ना जाने कब से ताला लटका है   घंटा घर से चांदनी चौक तक चलता तांगा अब शायद ही दिखे पर साठ के दशक में चलने वाली ट्राम … Continue reading कमला नगर दोस्तों को एक आमंत्रण (Kishore Jha)

क्या कागजी ही रहेगा बालश्रम कानून – किशोर झा (Kishore Jha)

मंत्रिमंडलीय समितिद्वारा बालश्रम (प्रतिबंधन एवं विनियमन) अधिनियम, 1986 में संशोधन को मंजूरी दिए छह महीने से ज्यादा हो गए हैं, पर अभी तक यह संसद के दोनों सदनों में पास नहीं हो पाया है। इस संशोधन को राज्यसभा में पेश भी किया जा चुका है, पर मामला उससे आगे नहीं बड़ा है। इस अधिनियम में संशोधन के बाद चौदह वर्ष से कम आयु के बच्चों … Continue reading क्या कागजी ही रहेगा बालश्रम कानून – किशोर झा (Kishore Jha)

हमारी चुप्पियों को भी ज़माना याद रखेगा – किशोर झा (Kishore Jha)

बांग्लादेशी जन ज्वार पर मुर्दा शांति सन २०११ में भ्रष्टाचार के खिलाफ अन्ना आन्दोलन में उमड़े हजारों लोगों की तस्वीरें आज भी ज़ेहन में ताज़ा है। उन तस्वीरों को टी वी और अख़बारों में इतनी बार देखा था कि चाहें तो भी नहीं भुला सकते। लोग अपने-अपने घरों से निकल कर अन्ना के समर्थन में इक्कठे हो रहे थे और गली मोहल्लों में लोग भ्रष्टाचार के … Continue reading हमारी चुप्पियों को भी ज़माना याद रखेगा – किशोर झा (Kishore Jha)

कमल – Kishore Jha

मेरा काम कुछ ऐसा है कि अक्सर सफ़र में रहता हूँ और स्टेशन पर आना-जाना लगा रहता है. पर इतने सालों बाद भी स्टेशन से मोहब्बत नहीं हो पाई और वहां हमेशा कुछ बेचैनी सी महसूस होती है. गाड़ी से उतर के घर पहुचने की बेताबी रहती है और स्टेशन से बाहर आकर पहली चुनौती होती है एक ऑटो पकड़ना जो आपको घर तक ले … Continue reading कमल – Kishore Jha