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आंबेडकर के लोकतांत्रिक समाजवाद से क्यों असहमत थी संविधान सभा?

डॉ. आंबेडकर ने 15 मार्च 1947 को संविधान में कानून के द्वारा ‘राज्य समाजवाद’ को लागू करने के लिए संविधान सभा को ज्ञापन दिया। उन्होंने मांग की थी कि भारत के संविधान में यह घोषित किया जाए कि उद्योग, कृषि, भूमि और बीमा का राष्ट्रीयकरण होगा तथा खेती का सामूहिकीकरण। लेकिन संविधान सभा ने ऐसा होने नहीं दिया। बता रहे हैं कंवल भारती संविधान दिवस (26 नवंबर 1949) पर विशेष डॉ. … Continue reading आंबेडकर के लोकतांत्रिक समाजवाद से क्यों असहमत थी संविधान सभा?

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Why the Constituent Assembly disagreed with Ambedkar’s democratic socialism

On 15 March 1947, Dr Ambedkar gave a memorandum to the Constituent Assembly for implementing “state socialism” through the Constitution. He wanted the Indian Constitution to mandate the nationalization of industry, agriculture, land and insurance, and collectivization of farming. But the Constituent Assembly did not let this happen, writes Kanwal Bharti Dr B.R. Ambedkar was knowledgeable about Constitutions adopted around the world and believed that the … Continue reading Why the Constituent Assembly disagreed with Ambedkar’s democratic socialism

भंगी का उद्भव : कब और कैसे? -कँवल भारती

प्रोफेसर श्यामलाल की पुस्तक ‘Ambedkar and The Bhangis’ से भंगी का उद्भव : कब और कैसे? ‘The Bhangi : The Lowest of the Low Untouchable Castes’ शीर्षक पहले अध्याय में प्रोफेसर श्याम लाल ने भारत के अलग-अलग प्रान्तों में मैला उठाने वाले लोगों को किन-किन नामों से जाना जाता है, इसका वर्णन करते हुए यह पता लगाने की कोशिश की है कि वे भंगी कैसे … Continue reading भंगी का उद्भव : कब और कैसे? -कँवल भारती

Agitate to Prosecute Hate Speech – Teesta Setalvad

The Citizen and Newsclick Joint Production, July 26, 2014 Teesta Setalvad, eminent activist, speaks on Freedom of Dissent at the Idea of India Conclave. She emphasises the importance of having a cohesive intervention to counter the attacks on freedom of expression. Setalvad says that we must all agitate to prosecute hate speech and not allow it to be part of public amnesia, that is being … Continue reading Agitate to Prosecute Hate Speech – Teesta Setalvad

नए वर्ष के आगमन पर..(कँवल भारती)

नया वर्ष तू क्या लेकर आया है? आशाएं विश्वास हमें तो करना ही है क्यों न करेंगे? करते ही आये हैं. वांच रहे हैं लोग राशियाँ राशिफल में कुछ के चेहरे मुरझाये हैं, कुछ के फिर भी खिले हुए हैं. आँखों देखा नहीं समझते, कागद लेखे सीस नवाते. पता नहीं क्यों विसराते हम इस यथार्थ को वृक्ष बबूल का बोएँगे तो आम कहाँ पाएंगे? बोएँगे … Continue reading नए वर्ष के आगमन पर..(कँवल भारती)

डा. आंबेडकर का मिशन राजकीय समाजवाद है – (कँवल भारती)

      डा. आंबेडकर का मिशन ‘राजकीय समाजवाद’ था. मायावती जी के भक्त, जिन्होंने डा. आंबेडकर के साहित्य की ABC भी नहीं पढ़ी है, अगर चाहें तो उनकी एक किताब “राज्य और अल्पसंख्यक” जरूर पढ़ लें, वरना बहस में वे हमेशा मात खायेंगे. मैं यहाँ स्वयं कुछ न कह कर डा. तेज सिंह के शब्दों को प्रस्तुत कर रहा हूँ, जिनका अभी कुछ दिनों … Continue reading डा. आंबेडकर का मिशन राजकीय समाजवाद है – (कँवल भारती)

हिन्दू-मुसलमान में विभाजित राजनीति – (कॅंवल भारती)

लोकसभा के चुनावों में जिस तरह साम्प्रदायिकता की चेतना उभर कर आयी है, उससे पक्का लग रहा है कि भारतीय राजनीति में हिन्दू-मुसनमान के दो स्पष्ट ध्रुव बन चुके हैं। स्थिति यह भी लग रही है कि आगामी विधानसभा के चुनावों में भी यही साम्प्रदायिक चेतना हावी रहेगी, क्योंकि अनुच्छेद 370, कामन सिविल कोड और राम-मन्दिर के उठाये जा रहे विवाद यही माहौल बनाने जा … Continue reading हिन्दू-मुसलमान में विभाजित राजनीति – (कॅंवल भारती)

क्या बसपा का पतन होगा? – कँवल भारती

      ख़बरें यह आ रही हैं कि उत्तर प्रदेश में बहुजन समाज पार्टी (बसपा) 9 या 10 सीटों पर सिमट रही है. साफ है कि उसे बहुत भारी नुकसान होने जा रहा है. मेरा गृह जनपद रामपुर है और मंडल मुरादाबाद है, जिसमें दलितों की जाटव और वाल्मीकि दोनों उपजातियों ने मोदी के पक्ष में भाजपा को वोट दिया है. मुझे इसकी बिलकुल … Continue reading क्या बसपा का पतन होगा? – कँवल भारती

जाति-धर्म के शिकन्जे में लोकतन्त्र – कॅंवल भारती

          निस्सन्देह इस बार के लोकसभा चुनावों में एक बड़ा सवाल भ्रष्टाचार का उभर कर आया है। अरविन्द केजरीवाल से शुरु हुई इस लड़ाई ने यदि भ्रष्टाचार के सवाल पर युवा मध्य वर्ग को गम्भीर न बनाया होता, तो शायद भाजपा भी इसे अपने एजेण्डे में रखने वाली नहीं थी। केजरीवाल की भ्रष्टाचार-उन्मूलन की लड़ाई कहीं जनक्रान्ति में सफल न हो जाये,इसलिये … Continue reading जाति-धर्म के शिकन्जे में लोकतन्त्र – कॅंवल भारती