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आंबेडकर के लोकतांत्रिक समाजवाद से क्यों असहमत थी संविधान सभा?

डॉ. आंबेडकर ने 15 मार्च 1947 को संविधान में कानून के द्वारा ‘राज्य समाजवाद’ को लागू करने के लिए संविधान सभा को ज्ञापन दिया। उन्होंने मांग की थी कि भारत के संविधान में यह घोषित किया जाए कि उद्योग, कृषि, भूमि और बीमा का राष्ट्रीयकरण होगा तथा खेती का सामूहिकीकरण। लेकिन संविधान सभा ने ऐसा होने नहीं दिया। बता रहे हैं कंवल भारती संविधान दिवस (26 नवंबर 1949) पर विशेष डॉ. … Continue reading आंबेडकर के लोकतांत्रिक समाजवाद से क्यों असहमत थी संविधान सभा?

भंगी का उद्भव : कब और कैसे? -कँवल भारती

प्रोफेसर श्यामलाल की पुस्तक ‘Ambedkar and The Bhangis’ से भंगी का उद्भव : कब और कैसे? ‘The Bhangi : The Lowest of the Low Untouchable Castes’ शीर्षक पहले अध्याय में प्रोफेसर श्याम लाल ने भारत के अलग-अलग प्रान्तों में मैला उठाने वाले लोगों को किन-किन नामों से जाना जाता है, इसका वर्णन करते हुए यह पता लगाने की कोशिश की है कि वे भंगी कैसे … Continue reading भंगी का उद्भव : कब और कैसे? -कँवल भारती

दलितों की ही घर वापसी क्यों? – कँवल भारती

खबर है कि तमिलनाडु में संघ परिवार के भगवा संगठन ‘हिन्दू मक्कल काची’ ने 18 दलित ईसाईयों की हिन्दूधर्म में घर-वापसी कराई है. ये सभी लोग गरीब घरों से हैं और दिहाड़ी मजदूर हैं. इधर विश्व हिन्दू परिषद् के नेता प्रवीण तोगड़िया ने भी पश्चिम बंगाल के बीरभूमि में पचास लाख गरीब आदिवासियों की घर वापसी कराने का एलान किया है. पिछले दिनों उत्तर प्रदेश … Continue reading दलितों की ही घर वापसी क्यों? – कँवल भारती

नए वर्ष के आगमन पर..(कँवल भारती)

नया वर्ष तू क्या लेकर आया है? आशाएं विश्वास हमें तो करना ही है क्यों न करेंगे? करते ही आये हैं. वांच रहे हैं लोग राशियाँ राशिफल में कुछ के चेहरे मुरझाये हैं, कुछ के फिर भी खिले हुए हैं. आँखों देखा नहीं समझते, कागद लेखे सीस नवाते. पता नहीं क्यों विसराते हम इस यथार्थ को वृक्ष बबूल का बोएँगे तो आम कहाँ पाएंगे? बोएँगे … Continue reading नए वर्ष के आगमन पर..(कँवल भारती)

धर्मान्तरण की राजनीति : कब तक ? – कॅंवल भारती

विपक्ष ने धर्मान्तरण का मुद्दा ऐसे उठाया है, जैसे उनके लिए इससे बड़ा लाभ का मुद्दा कोई हो ही नहीं सकता। लेकिन मुद्दा सिर्फ इतना है कि विपक्ष जिसे धर्मान्तरण कह रहा है, संघ परिवार उसे ‘घर-वापसी’ कह रहा है। सच्चाई यह है कि दोनों झूठ की राजनीति कर रहे हैं। न कहीं धर्मान्तरण हो रहा है और न कहीं घर-वापसी हो रही है। दरअसल … Continue reading धर्मान्तरण की राजनीति : कब तक ? – कॅंवल भारती

क्या होगा धर्मान्तरण कानून से? – कॅंवल भारती

संघ परिवार और भाजपा ने देश में लगभग वही साम्प्रदायिक हालात पैदा कर दिए हैं, जो उसने 1990-93 में पैदा किए थे। 1993 में केन्द्र की कांग्रेस सरकार ने आक्रामक साम्प्रदायिकता से निपटने के लिए संसद में एक ‘धर्म-विधेयक’ प्रस्तुत किया था। अगर वह विधेयक पास हो गया होता, तो भाजपा की बेलगाम साम्प्रदायिकता पर लगाम लग गई होती। पर कांग्रेस की गलती से ही … Continue reading क्या होगा धर्मान्तरण कानून से? – कॅंवल भारती

गीता पर खतरनाक राजनीति -(कॅंवल भारती)

तवलीन सिंह वह पत्रकार हैं, जिन्होंने लोकसभा चुनावों में नरेन्द्र मोदी के पक्ष में लगभग अन्धविश्वासी पत्रकारिता की थी। लेकिन अब वे भी मानती हैं कि ‘मोदी सरकार ने जब से सत्ता सॅंभाली है, एक भूमिगत कट्टरपंथी हिन्दुत्व की लहर चल पड़ी है।’ उनकी यह टिप्पणी साध्वी निरंजन ज्योति के ‘रामजादे-हरामजादे’ बयान पर आई है। लेकिन इससे कोई सबक लेने के बजाए यह भूमिगत हिन्दू … Continue reading गीता पर खतरनाक राजनीति -(कॅंवल भारती)

किस भगवान ने गरीबों का भला किया है? – कॅंवल भारती

चाटुकार लोग कितनी जल्दी अपनी निष्ठा बदलते हैं, इसका ताजा उदाहरण लोकेश चन्द्र हैं, जिन्हें मोदी सरकार ने आईसीसीआर का नया अध्यक्ष नियुक्त किया है। जीवन भर कांग्रेस में रहकर खूब मलाई खाई और पद्मभूषण का तमगा हासिल किया। अब मोदी की चाटुकारिकारिता करके भारतीय इतिहास अनुसंधान परिषद के उपाध्यक्ष से अध्यक्ष बन गए हैं। यानी उन्होंने अपने हिन्दुत्ववादी मिथकीय विचारों से कांग्रेस में रहकर … Continue reading किस भगवान ने गरीबों का भला किया है? – कॅंवल भारती

बरसात – कँवल भारती

      (दिलीप मंडल को पढ़ने के बाद) दो किस्म के लोग होते हैं, एक वे जो मानसून के आगे-आगे भागते हैं दूसरे वे जो रोज मानसून में भीगते हैं, पहले किस्म के लोग आनंद लेते हैं मानसून का चाय-पकौड़ों के साथ दूसरे भीगते हैं पेट की आग बुझाने के लिए. हम एक को कह सकते हैं पेट-भरे लोग, और दूसरे को खाली पेट … Continue reading बरसात – कँवल भारती

फिरकापरस्तों के हवाले वतन साथियो (कँवल भारती)

      मुरादाबाद के कांठ में जनता और पुलिस के संघर्ष से बचा जा सकता था. किन्तु, जिला प्रशासन ने मुजफ्फरनगर के दंगों से भी कोई सबक नहीं लिया और सरकार की मंशा के अनुरूप एक गुट को खुश करने के लिए दूसरे गुट के खिलाफ कार्यवाही करके पूरी फिजा बिगाड़ दी. प्रशासन को तब तो और भी सावधानी बरतनी चाहिए थी, जब उसे … Continue reading फिरकापरस्तों के हवाले वतन साथियो (कँवल भारती)