Romila Thapar: “The battle now is between religious nationalism and secular nationalism . . .”

Romila Thapar, who has been associated with Jawaharlal Nehru University for many years, speaks to writer Githa Hariharan on the idea of a university like JNU. The idea was to explore Indian society through inter-disciplinary studies and discussion. At the Centre for Historical Studies with which she was associated, the past was not another country; the past shaped the present. Professor Thapar points out that … Continue reading Romila Thapar: “The battle now is between religious nationalism and secular nationalism . . .”

खाद का इतिहास नहीं लिखा जाता – Dilip Mandal

कुछ लोग खाद होते हैं. खाद का इतिहास नहीं लिखा जाता, कुछ समय बाद नजर भी नहीं आता, लेकिन यह बड़ी जरूरी चीज है इसके बिना फसल नहीं होती है इसलिए खाद को भूलिए मत! इन दिनों जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी को पास से देखने का मौका मिला. कई कोर्स की एडमिशन लिस्ट देखी. लगभग हर कोर्स में SC-ST-OBC स्टूडेंट्स की संख्या 50% से ज्यादा है. … Continue reading खाद का इतिहास नहीं लिखा जाता – Dilip Mandal

68 साल का मुल्क, 18 साल का नौजवान होता है – राकेश कायस्थ

मुल्क की जिंदगी में 68वें साल की कुछ वैसी ही अहमियत है, जैसे किसी नौजवान की जिंदगी में 18 वें साल की। गिरता-संभलता, लखड़खडाता और लड़कपन की गलतियों को भुलाता भारत अपने अनगिनत सपनों के साथ नई मंजिल की तरफ बढ़ने को बेताब है। ये सच है कि देश हमेशा व्यक्ति से बड़ा होता है। लेकिन ये भी सच है कि व्यक्ति के बिना देश … Continue reading 68 साल का मुल्क, 18 साल का नौजवान होता है – राकेश कायस्थ

सुभाषचन्द्र बोस और जवाहरलाल नेहरू – Mayank Saxena

सुभाषचन्द्र बोस और जवाहरलाल नेहरू – ये पूरी बहस पिछले लगभग 75-80 साल से चलती आ रही है…सवाल ये है कि हम इस मामले को क्या रेशनल हो कर देखते हैं…तो हम कैसे रेशनल हो कर देख सकते हैं…क्योंकि हम उस वक्त थे नहीं…ऐसे में रेशनल होने के लिए निष्पक्ष तर्क अपनाने के लिए सभी को पढ़ना पड़ेगा…सब यानी कि सिर्फ वो लोग नहीं, जो … Continue reading सुभाषचन्द्र बोस और जवाहरलाल नेहरू – Mayank Saxena

नये नेताओं के अलग-अलग विचार (Different views of new leaders) – भगतसिंह

Date Written: July 1928 Author: Bhagat Singh Title: Different views of new leaders (Naye netaon ke alag alag vicar) First Published: in Kirti July 1928. जुलाई, 1928 के ‘किरती’ में छपे इस लेख में भगतसिंह ने सुभाषचन्द्र बोस और जवाहरलाल नेहरू के विचारों की तुलना की है। असहयोग आन्दोलन की असफलता के बाद जनता में बहुत निराशा और मायूसी फैली। हिन्दू-मुस्लिम झगड़ों ने बचा-खुचा साहस भी खत्म … Continue reading नये नेताओं के अलग-अलग विचार (Different views of new leaders) – भगतसिंह