Inside the #MeToo revolt at Google

Kristen Sheets reports on the walkout at Google — why it happened, how it was organized, what it achieved and what it tells us about organizing the tech sector. THE NOVEMBER 1 walkout by 20,000 Google employees at some 50 offices around the world may be the largest international action of its kind in modern labor history — and it shined a spotlight on the … Continue reading Inside the #MeToo revolt at Google

मनमोहन सिंह: गुजरात चुनावों में हार की आशंका से हर तरह के हथकंडे इस्तेमाल कर रहे हैं मोदी

    पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा कि वह प्रधानमंत्री मोदी द्वारा इस आधारहीन मुद्दे को ओछी राजनीति के लिए जबरन तूल दिए जाने से काफी आहत महसूस कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि गुजरात चुनावों में हार के डर से वह इस तरह के बेबुनियाद आरोप लगा रहे हैं, चुनावों में हार की आशंका से प्रधानंत्री हर तरह के हथकंडे इस्तेमाल कर रहे … Continue reading मनमोहन सिंह: गुजरात चुनावों में हार की आशंका से हर तरह के हथकंडे इस्तेमाल कर रहे हैं मोदी

Muslim Women’s organization calls BJP’s bluff

Bebaak Collective (Voices of the Fearless), have issued a  statement univocally condemning the comment made by the BJP leader Subramanian Swamy in an event in Mumbai on Friday, 27th October that the party could win in Uttar Pradesh elections because Muslim women believed that it was BJP who could save them from ‘triple talaq’. (See, “Muslim women felt only BJP could save them from triple … Continue reading Muslim Women’s organization calls BJP’s bluff

इस्लाम (मुसलमान) को किससे ख़तरा है ? – Shakil Khan

इस्लाम (मुसलमान) को किससे ख़तरा है ? क्या ग़रीबी से ? क्या आशिक्षा से ? क्या राजनीतिक हिस्सेदारी में कमी से ? क्या प्रशासन में उनकी उपेक्षा से ? पुलिस उत्पीड़न से ? बढ़ती बहुसंख्यक संप्रदायिकता से ? नही साहब बिलकुल नही ख़तरे उससे भी बड़े हैं सानिया मिर्ज़ा की मिनी स्कर्ट शमी की पत्नी के फ़ोटो इरफ़ान की वाइफ़ की नेल पोलिश रहमान का … Continue reading इस्लाम (मुसलमान) को किससे ख़तरा है ? – Shakil Khan

गांधी, चार्ली, चर्चिल और मशीन -3 (Nitin Thakur)

1931 में जब चार्ली चैप्लिन गांधी से मिल रहे थे तब उन्हें बाज़ार में बढ़ते मशीनीकरण के नुकसानों का उतना अंदाज़ा नहीं था। दुनिया बहुत तेज़ी के साथ मशीनों पर निर्भर होती जा रही थी। पहले विश्वयुद्ध के बाद बर्बाद हुए देश तेज़ी से खड़े होने के लिए मशीनों पर सवार थे और जर्मनी उनमें सबसे आगे था। अंग्रेज़ों ने भी मैनचेस्टर में मशीनों से … Continue reading गांधी, चार्ली, चर्चिल और मशीन -3 (Nitin Thakur)