मकान – कैफी आजमी

  आज की रात बहुत गरम हवा चलती है आज की रात न फुटपाथ पे नींद आयेगी । सब उठो, मैं भी उठूँ, तुम भी उठो, तुम भी उठो कोई खिड़की इसी दीवार में खुल जायेगी । ये जमीन तब भी निगल लेने पे आमादा थी पाँव जब टूटी शाखों से उतारे हम ने । इन मकानों को खबर है ना मकीनों को खबर उन … Continue reading मकान – कैफी आजमी