Republic के पत्रकार को हड़काया Shehla Rashid ने – Dilip Khan

दो दिनों से कई पोस्ट पढ़ चुका हूं जिसमें Shehla Rashid की इस बात पर आलोचना की जा रही है कि उसने Republic के पत्रकार को क्यों हड़काया। कुछ बातें कहने को हैं: 1. ये जो ताज़ा रिपब्लिक है और जिसका डॉन पहले TIMES NOW में था, उसने कैसी रिपोर्टिंग और कैसी डिबेट की JNU को लेकर? ज़्यादा नहीं, बस डेढ़ साल पहले की बात … Continue reading Republic के पत्रकार को हड़काया Shehla Rashid ने – Dilip Khan

सुन Circuit! बोले तो अब वोटबंदी मांगता है- Rakesh Kayasth

  कमाल का देश है अपना! मनोरंजन के लिए बनाई गई फिल्में शिक्षा देती हैं और जनता को शिक्षित करने के लिए गये महान राजनीतिक फैसले आखिर में मनोरंजक साबित होते हैं। नोटबंदी में सरकार को इतने नोट मिले थे कि गिनती नहीं हो पा रही थी। डर था कि गिनने की ड्यूटी से उकता गये आरबीआई के गर्वनर साहब नौकरी ना बदल लें, जैसे … Continue reading सुन Circuit! बोले तो अब वोटबंदी मांगता है- Rakesh Kayasth

एक बच्चा जिसे सब भूल जाते हैं- प्रदीप

  एक गड्ढा है जिसमें वह गिर गया है और उसके साथ जो आया है, वह रुकता नहीं उसके लिए. जैसे कई बार आपके सपने में होता होगा, आप गिरते चले जाते होंगे कहीं गहरे और चीख़ते होंगे लेकिन आवाज़…! वह तो अंदर ही कहीं गोल घूम कर रह गयी है. या फिर आपके जीवन में मौजूद आपसे सबसे ज़्यादा प्यार करने का दावा रखने … Continue reading एक बच्चा जिसे सब भूल जाते हैं- प्रदीप

आमिर झूठ सेहत के लिए हानिकारक है – Rakesh Kayasth

  दंगल मुझे भारत में बनी सबसे अच्छी स्पोर्ट्स मूवी लगी। हॉल से निकलते वक्त मेरे 11 साल के बेटे ने पूछा- क्या सचमुच गीता के कोच ने फाइनल वाले दिन महावीर फोगट को कमरे में बंद करवा दिया था। मैने जवाब दिया– मुझे मालूम नहीं। लेकिन आमिर खान ने फिल्म रिसर्च के बिना नहीं बनाई होगी। आज सुबह के टाइम्स ऑफ इंडिया में कॉमनवेल्थ … Continue reading आमिर झूठ सेहत के लिए हानिकारक है – Rakesh Kayasth

पचास दिन पचास रात – बोधिसत्व

  यह बड़ी पुरानी बात है कोसल का एक राजा था एक दिन राजा ने उद्बोधन किया … प्रिय प्रजाजनों प्रिय संत जनों राष्ट्र हित में बस पचास दिन और पचास रात जो देता हूँ वह दुख सहन करो वह राजा था इसलिए उद्बोधन कर सकता था दुख सुख सब कुछ दे सकता था भक्त प्रजा ने भजन किया बस पचास दिन और पचास रात … Continue reading पचास दिन पचास रात – बोधिसत्व

बंदरों के हाथ में उस्तरे का दौर है – Pankaj Dubey

सड़कों पर खामोशी बैंकों में शोर है रातें हैं लंबी जाने कहां भोर है डिजिटल के नाम पर नकदी ले गया चोर है बंदरों के हाथ में उस्तरे का दौर है Continue reading बंदरों के हाथ में उस्तरे का दौर है – Pankaj Dubey

देशहित कोई अदृश्य देवता है – Charu Mishra

  देशहित कोई अदृश्य देवता है जिसके लिए जन जन को अपना खून पसीना बहा देना चाहिए। अपनी भूख प्यास और बीमारी भूल जानी चाहिए। आदिवासियों और किसानों को इसकी पूजा में अपनी ज़मीने अर्पित कर देनी चाहिए और सिपाहियों को अपना सुख अपनी जान छात्रो को शिक्षा का बजट और स्कॉलरशिप न्योछावर कर देनी चाहिए तो बच्चों को स्वास्थ्य सुविधाएं कर्मचारियों को बुढ़ापे का … Continue reading देशहित कोई अदृश्य देवता है – Charu Mishra