आर्यवर्त की सजग सरकार-बोधिसत्व

  तभी अचानक सावन के दिव्य महीने में सर्वथा नूतन सरकार ने … एक नया नवेला नियम बनाया घर में दफ्तर में बाजार में रात दिन दोपहर मे नदी नाले नहर में डूब कर या खा कर जहर जो जान गवांएगा ऐसा आत्म हत्यारा देश के लिए शहीद माना जाएगा ऐसे आत्म बलिदानियों की भव्य समाधि बनेगी नगर चौक पर मूर्ति बिठाई जाएगी जन कवियों … Continue reading आर्यवर्त की सजग सरकार-बोधिसत्व

Mayank Saxena

मैं लौटता हूं मगर लौट नहीं पाता – Mayank Saxena

मैं लौटता हूं मगर लौट नहीं पाता देखता हूं तो पाता हूं कि उनमें से कोई नहीं है वैसा जैसा छोड़ गया था मैं पेड़ों की ऊंचाई घटती रही और उसे पूरी करती रही बढ़ती ऊंचाई दीवारों की दोस्तों ने कहा था कि यहीं मिलेंगे और मिलते रहे वो अलग अलग शहरों में कितनी ही कहानियों के किरदार बदल गए और कहानियां भी नहीं बदले … Continue reading मैं लौटता हूं मगर लौट नहीं पाता – Mayank Saxena

आज मेरी माहवारी का दूसरा दिन है – Damini Yadav

आज मेरी माहवारी का दूसरा दिन है। पैरों में चलने की ताक़त नहीं है, जांघों में जैसे पत्थर की सिल भरी है। पेट की अंतड़ियां… दर्द से खिंची हुई हैं। इस दर्द से उठती रूलाई जबड़ों की सख़्ती में भिंची हुई है। कल जब मैं उस दुकान में ‘व्हीस्पर’ पैड का नाम ले फुसफुसाई थी, सारे लोगों की जमी हुई नजरों के बीच, दुकानदार ने … Continue reading आज मेरी माहवारी का दूसरा दिन है – Damini Yadav

यही वे हाथ हैं जो इम्तियाज़ हैं – नाचीज़

David Cuttingham   कुछ हाथ हैं सुर्ख सफेद कुछ हाथ दराज हैं दस्‍त दराज हैं कुछ हाथ हैं गंदे मटमैले कुछ हाथ फराज हैं, सरफराज हैं कुछ हाथ हैं खून से रंगे हुए कुछ हाथ हैं अंधेरा बुन रहे कुछ हाथ हैं उनके साथ हैं कुछ हाथ हैं अंधेरा सहेज रहे कुछ हाथ हैं उनके पासबान हैं कुछ और भी हाथ हैं अंधेरे के ये … Continue reading यही वे हाथ हैं जो इम्तियाज़ हैं – नाचीज़

आग जलती रहे- दुष्यंत कुमार (Dushyant Kumar)

    एक तीखी आँच ने इस जन्म का हर पल छुआ, आता हुआ दिन छुआ हाथों से गुजरता कल छुआ हर बीज, अँकुआ, पेड़-पौधा, फूल-पत्ती, फल छुआ जो मुझे छुने चली हर उस हवा का आँचल छुआ … प्रहर कोई भी नहीं बीता अछुता आग के संपर्क से दिवस, मासों और वर्षों के कड़ाहों में मैं उबलता रहा पानी-सा परे हर तर्क से एक … Continue reading आग जलती रहे- दुष्यंत कुमार (Dushyant Kumar)

जो पुल बनाएंगे बन्दर कहलाएंगे – अज्ञेय

  जो पुल बनाएंगे वे अनिवार्यत: पीछे रह जाएंगे। सेनाएँ हो जाएंगी पार मारे जाएंगे रावण जयी होंगे राम, जो निर्माता रहे इतिहास में बन्दर कहलाएंगे Continue reading जो पुल बनाएंगे बन्दर कहलाएंगे – अज्ञेय