हम सब अभिशप्त हैं, क्योंकि हम देख और महसूस कर पाते हैं – Mayank Saxena

आप वो समाज हैं, जो बाबरी गिरने के बाद घरों की छतों पर खड़े हो कर थालियां पीट रहे थे..घंटे-घड़ियाल बजा रहे थे…रात को मशाल ले कर विजय जुलूस निकाल रहे थे…दीए जला रहे थे… आप वह समाज हैं, जो गुजरात के निर्मम जनसंहार में हज़ार लोगों के बेरहम क़त्ल को गोधरा को लेकर तर्कसंगत बताने में लगे थे…बिल्कीस के बलात्कार, उसकी तीन साल की … Continue reading हम सब अभिशप्त हैं, क्योंकि हम देख और महसूस कर पाते हैं – Mayank Saxena

आर्यवर्त की सजग सरकार-बोधिसत्व

  तभी अचानक सावन के दिव्य महीने में सर्वथा नूतन सरकार ने … एक नया नवेला नियम बनाया घर में दफ्तर में बाजार में रात दिन दोपहर मे नदी नाले नहर में डूब कर या खा कर जहर जो जान गवांएगा ऐसा आत्म हत्यारा देश के लिए शहीद माना जाएगा ऐसे आत्म बलिदानियों की भव्य समाधि बनेगी नगर चौक पर मूर्ति बिठाई जाएगी जन कवियों … Continue reading आर्यवर्त की सजग सरकार-बोधिसत्व

सरकार के दो और बड़े फैसले हंसी और विलाप टैक्स -Bodhi Sattva

आज जो भी दिन दिनांक हो इसे सुदिन शुभ मान कर सरकार ने दो बड़े मार्मिक निर्णय लिए हैं….इसके लिए सरकार ने एक नए महकमें की स्थापना की है…जिसका नाम हंसी विलाप टैक्स विभाग रखा गया है.. आज और अभी से जो भी नर नारी बालक वृद्ध किसी भी स्थिति में रोता हुआ पाया जाएगा उस पर देश द्रोह का मुकदमा चलेगा, रोना अब एक … Continue reading सरकार के दो और बड़े फैसले हंसी और विलाप टैक्स -Bodhi Sattva

प्रायश्चित -Neelabh Ashk

इस माफ़ीनामे को शुरू करने से पहले ही मुझे शिद्दत से इस बात का एहसास है कि इसे सही तरह से लिख कर पेश करने में ख़ासी दुश्वारी होने वाली है. कुछ तो बातें ही ऐसी हैं कि काफ़ी उलझी हुई हैं और ऊपर से इसका ताल्लुक़ किसी एक व्यक्ति से नहीं है, बल्कि यह एक समूचे सम्मानित परिवार के प्रति किये गये अशोभनीय व्यवहार … Continue reading प्रायश्चित -Neelabh Ashk

Mayank Saxena

मैं लौटता हूं मगर लौट नहीं पाता – Mayank Saxena

मैं लौटता हूं मगर लौट नहीं पाता देखता हूं तो पाता हूं कि उनमें से कोई नहीं है वैसा जैसा छोड़ गया था मैं पेड़ों की ऊंचाई घटती रही और उसे पूरी करती रही बढ़ती ऊंचाई दीवारों की दोस्तों ने कहा था कि यहीं मिलेंगे और मिलते रहे वो अलग अलग शहरों में कितनी ही कहानियों के किरदार बदल गए और कहानियां भी नहीं बदले … Continue reading मैं लौटता हूं मगर लौट नहीं पाता – Mayank Saxena

जो पुल बनाएंगे बन्दर कहलाएंगे – अज्ञेय

  जो पुल बनाएंगे वे अनिवार्यत: पीछे रह जाएंगे। सेनाएँ हो जाएंगी पार मारे जाएंगे रावण जयी होंगे राम, जो निर्माता रहे इतिहास में बन्दर कहलाएंगे Continue reading जो पुल बनाएंगे बन्दर कहलाएंगे – अज्ञेय

श्री लाल शुक्ल…ये आपको समर्पित है – Mayank Saxena

(राग दरबारी के अंश में थोड़ा शब्दों का हेर-फेर कर के ये अंश लिखा गया है…राग दरबारी के प्रेमी या पाठक ही पढ़ें…क्योंकि अन्य के लिए समझना थोड़ा मुश्किल होगा…बुरा न मानें-दिल पर न लें…लेना है तो शांति से काम लें…) उन्होंने लोगों के दो वर्ग बना रखे थेः राष्ट्रवादी और सेक्युलर। वे राष्ट्रवादियों की प्रकट रुप से और सेक्युलरों की गुप्त रुप से सहायता … Continue reading श्री लाल शुक्ल…ये आपको समर्पित है – Mayank Saxena

समय रे समय! – मृत्युंजय प्रभाकर

समय रे समय! 6/03/2013 ह्यूगो चावेज़ को समर्पित समय की खूंटी पर नंगी लाश टंगी है खून पसरा है फर्श पर दीवालों पर छीटें बिखरे हैं जलते लोथड़े फैले हैं इधर-उधर जबकि टेबल पर बोतल खुली है और पलंग पर जांघें कहते हैं यहाँ सभ्यता बसती है। मृत्युंजय प्रभाकर Continue reading समय रे समय! – मृत्युंजय प्रभाकर

मैं हूं – Mrityunjay Prabhakar

                गेहूं की बालियों मटर के दानों चावल की बोरियों आलू के खेतों में बनमिर्ची के झुरमुटों आम के दरख्तों जामुन की टहनियों अमरूद के पेड़ों में गांव की गलियों खेतों की पगडंडियों सड़कों के किनारों शहरों की परिधि में रात की चांदनी सहर के धुंधलके शाम की सस्ती चाय दोपहर के सादे भोजन में साइबरस्पेस के किसी … Continue reading मैं हूं – Mrityunjay Prabhakar