चैनलों को ‘सिंगल आउट’ करके मीडिया को यह संकेत दिया गया है कि उन्हें ‘समय के साथ’ कैसे चलना चाहिए! – QW Naqwi

असम के भी एक चैनल पर एक दिन की रोक लगायी गयी है. यात्रा पर हूँ, इसलिए देर से लिख रहा हूँ. हालाँकि देखा कि इस मुद्दे पर सोशल मीडिया में ज़्यादा कुछ नहीं कहा गया. लेकिन मामला गम्भीर है और NDTV के मामले की ही अगली कड़ी है. अब यह साफ़ हो गया है कि जिस तरह की ‘संवेदनशील’ जानकारियाँ उजागर करने के लिए … Continue reading चैनलों को ‘सिंगल आउट’ करके मीडिया को यह संकेत दिया गया है कि उन्हें ‘समय के साथ’ कैसे चलना चाहिए! – QW Naqwi

सपा, बसपा और हमारी भूमिका – कॅंवल भारती

          उत्तर प्रदेश में लोकसभा-2014 के चुनाव-परिणाम इसलिये नहीं चैंकाते हैं कि भाजपा की इतनी बड़ी जीत अप्रत्याशित थी, बल्कि इसलिये चैंकाते हैं कि इसने बसपा का सूपड़ा साफ कर दिया है और सपा को पाॅंच सीटों पर समेट दिया है। उत्तर प्रदेश की राजनीति में सपा-बसपा की इस शर्मनाक पराजय के दूरगामी अर्थ हैं। कुछ चिन्तकों का कहना है कि … Continue reading सपा, बसपा और हमारी भूमिका – कॅंवल भारती

समय रे समय! – मृत्युंजय प्रभाकर

समय रे समय! 6/03/2013 ह्यूगो चावेज़ को समर्पित समय की खूंटी पर नंगी लाश टंगी है खून पसरा है फर्श पर दीवालों पर छीटें बिखरे हैं जलते लोथड़े फैले हैं इधर-उधर जबकि टेबल पर बोतल खुली है और पलंग पर जांघें कहते हैं यहाँ सभ्यता बसती है। मृत्युंजय प्रभाकर Continue reading समय रे समय! – मृत्युंजय प्रभाकर