गांधी और अंबेडकर के एक होने का वक्त आ गया है – Rakesh Kayasth

इतिहास के कुछ कालखंड निर्णायक होते हैं। हम एक ऐसे ही निर्णायक कालखंड में दाखिल हो चुके हैं। यह समय बीसवीं सदी के दो सबसे प्रखर बौद्धिक विचारों के एक होने का है। वो विचार जिन्हे हमेशा दो अलग ध्रुव माना गया और दोनो अलग-अलग रहे भी। ये विचार हैं, गांधीवाद  और अंबेडकरवाद। तीस के दशक में गांधी और अंबेडकर के बीच गहरा वैचारिक और … Continue reading गांधी और अंबेडकर के एक होने का वक्त आ गया है – Rakesh Kayasth

From Nirma to NaMo – Jean Drèze

It is interesting how media reports of Narendra Modi’s rallies differ from the real thing. To see the difference for myself, I attended Narendra Modi’s recent rally in Ranchi. More than 10 days in advance, the rally had been the object of a massive publicity campaign in Ranchi. There were giant posters of Modi and his party colleagues at almost every chauraha, sometimes ten or … Continue reading From Nirma to NaMo – Jean Drèze

सच सिर्फ वो नहीं होता, जो सामने दिखता है – Manisha Pandey

मीडिया के लोग काफी बढ़-चढ़कर तरुण तेजपाल के चरित्र के खिलाफ और उस लड़की की बहादुरी के पक्ष में चीख-चिल्‍ला रहे हैं। लेकिन ये तो वो बात है, तो पर्दे पर दिख रही है या अखबार के पन्‍नों पर छप रही है। इसके अलावा उन मीडिया वालों की निजी महफिलों में, चाय की दुकानों, पान की गुमटियों और पर्सनल दारू पार्टियों में भी तो कभी … Continue reading सच सिर्फ वो नहीं होता, जो सामने दिखता है – Manisha Pandey