जेल के नाम रवीश कुमार का एक प्रेम पत्र

प्रिय जेल, चौंक गई ! क्या जेल को प्रिय नहीं पुकारा जा सकता । जब हम प्रेम में गिरफ़्तार हो सकते हैं तो जेल से प्रेम क्यों नहीं कर सकते । लोगों ने जेल से किताबें लिखीं, जेल में रहते हुए पुत्री के नाम पत्र लिखे लेकिन किसी ने जेल को पत्र नहीं लिखा । दुनिया में जेल को प्रिय पुकारने वाला प्रथम पुरुष मैं … Continue reading जेल के नाम रवीश कुमार का एक प्रेम पत्र

Communal Violence in 2015 – Rise in Hatred and Polarization

Neha Dabhade Communal violence, polarization of communities and the institutionalization of hatred it results in; have emerged as most the prominent threats engulfing the country in the year 2015. This has spelled adverse repercussions on communal harmony and led to shrinking of democratic space. This year, figures available till October suggest that there were 650 incidents of communal violence in which 84 people lost their … Continue reading Communal Violence in 2015 – Rise in Hatred and Polarization

निशाने पर सहिष्णुता नहीं संविधान है ! – Pankaj Srivastava

    आमिर ने आख़िर क्या कहा, जो ऐसा हंगामा बरपा है? यही न, कि उनकी पत्नी ने हालात से तंग आकर उनसे देश छोड़ने की बात छेड़ी। कहा कि अख़बार देखकर डर लगता है। आमिर ने तो बस इसकी जानकारी दी, वह भी इसे ‘डिज़ास्टरस’ (विनाशकारी) बताते हुए । अगर दिक़्क़त है तो आमिर के नहीं उस किरण के बारे में सोचो जो उदास … Continue reading निशाने पर सहिष्णुता नहीं संविधान है ! – Pankaj Srivastava

Mayank Saxena

प्रिय FTII Wisdom Tree के साथियों – मयंक सक्सेना

प्रिय FTII Wisdom Tree के साथियों, आपने अपनी हड़ताल खत्म कर दी है…कहा है कि आंदोलन जारी रहेगा…अच्छा किया है, मैं एक हद तक सहमत हूं…लेकिन एक सवाल है…जो मन में कौंध रहा है…सोचा कि सबसे साझा करूं… पिछले लगभग डेढ़ सौ दिनों में देश भर के लेखक-साहित्यकार-फिल्मकार ही नहीं…आम छात्र…क़ॉलेज-विश्वविद्यालय…और लोग… FTII Film Institute Pune के छात्रों के समर्थन में न केवल आए…बल्कि खुलकर … Continue reading प्रिय FTII Wisdom Tree के साथियों – मयंक सक्सेना