किसकी जेब के आठ लाख करोड़?- Qamar Waheed Naqvi

सरकारी बैंकों के क़र्ज़ों का महाघोटाला कोई एक-दो लाख करोड़ का मामला नहीं है. क़रीब साढ़े आठ लाख करोड़ रुपये के क़र्ज़े ऐसे हैं, जिनकी वसूली की सम्भावना अब न के बराबर समझी जा रही है! यानी भारत की कुल जीडीपी का क़रीब 6.7 प्रतिशत हिस्सा चट किया जा चुका है या जिसके वापस मिलने की अब लगभग उम्मीद नहीं है! और इनमें से 87 … Continue reading किसकी जेब के आठ लाख करोड़?- Qamar Waheed Naqvi

ज़ी न्यूज़ के नाम मेरा पत्र – विश्वदीपक

विश्वदीपक हम पत्रकार अक्सर दूसरों पर सवाल उठाते हैं लेकिन कभी खुद पर नहीं. हम दूसरों की जिम्मेदारी तय करते हैं लेकिन अपनी नहीं. हमें लोकतंत्र का चौथा खंभा कहा जाता है लेकिन क्या हम, हमारी संंस्थाएं, हमारी सोच और हमारी कार्यप्रणाली लोकतांत्रिक है ? ये सवाल सिर्फ मेरे नहीं है. हम सबके हैं. JNUSU अध्यक्ष कन्हैया कुमार को ‘राष्ट्रवाद’ के नाम पर जिस तरह … Continue reading ज़ी न्यूज़ के नाम मेरा पत्र – विश्वदीपक

Entering a forbidden terrain: Women Qazis, ‘Auraton ki Shariah Adalat’, what next?

Courtesy: Sabrangindia.in Written by Zakia Soman,Noorjehan Safia Niaz | Published on: February 21, 2016 Why the Bharatiya Muslim Mahila Andolan is throwing one challenge after another at the ulema’s male-oriented version of ‘Islam’ Bharatiya Muslim Mahila Andolan (BMMA) recently announced the formation of Darul Uloom Niswaan [DUN], a centre for Islamic learning and theology for women. As part of this initiative, DUN has begun the training … Continue reading Entering a forbidden terrain: Women Qazis, ‘Auraton ki Shariah Adalat’, what next?