Dalit Media Watch -News Updates 18.03.16

  Dalits Not Allowed to Enter Tirupur Temple, HR&CE Dept Says It Will Lose Its Sanctity – The new Indian express http://www.newindianexpress.com/states/tamil_nadu/Dalits-Not-Allowed-to-Enter-Tirupur-Temple-HRCE-Dept-Says-It-Will-Lose-Its-Sanctity/2016/03/18/article3332993.ece Police lathi-charge protesting Dalits, bury Sankar’s body by force – Round table india http://roundtableindia.co.in/index.php?option=com_content&view=article&id=8511&catid=129&Itemid=195 ‘Kausalya wants to return to husband’s family’ – Nyoooz http://www.nyoooz.com/coimbatore/394575/kausalya-wants-to-return-to-husbands-family RECOGNISE INHUMANITY OF THE CASTE SYSTEM – The pioneer http://www.dailypioneer.com/letters-to-the-editor/recognise-inhumanity-of-the-caste-system.html What Tamil Women Want in 2016: An End to Domestic … Continue reading Dalit Media Watch -News Updates 18.03.16

मैंने तेरा खत पढ़ा – Swanand Kirkire

मैंने तेरा खत पढ़ा और रहा में चुप खड़ा तू आया रोया मर गया तू लड़ गया सूली चढ़ा सितारों की तू धुल था तू जंगलों का फूल था मैं सदियों का फंसा हुआ मैं सदियों का धंसा हुआ सड़ा हुआ सही मगर मेरा भी एक उसूल था विज्ञान मेरी जेब में और ज्ञान मेरे सर चढ़ा वो तुझको ना बचा सका जो कुछ भी … Continue reading मैंने तेरा खत पढ़ा – Swanand Kirkire

मेरी माँ का इतिहास

1. मेरी माँ बताती है मेरे पूर्वज डांगर खाते थे. और बड़ी जातियों के विवाह में बचा बासी भोजन माँ ने बताया हमारे रिश्तेदारों के घर या तो दक्षिण में थे या उत्तर में आज भी उनके घर कमोबेश उसी दिशा में होते हैं मेरा भी घर गावं के दक्खिन ही है. 2. पता पूछने पर न चाहते हुए भी लोग जान जाते हैं हमारी … Continue reading मेरी माँ का इतिहास

नए वर्ष के आगमन पर..(कँवल भारती)

नया वर्ष तू क्या लेकर आया है? आशाएं विश्वास हमें तो करना ही है क्यों न करेंगे? करते ही आये हैं. वांच रहे हैं लोग राशियाँ राशिफल में कुछ के चेहरे मुरझाये हैं, कुछ के फिर भी खिले हुए हैं. आँखों देखा नहीं समझते, कागद लेखे सीस नवाते. पता नहीं क्यों विसराते हम इस यथार्थ को वृक्ष बबूल का बोएँगे तो आम कहाँ पाएंगे? बोएँगे … Continue reading नए वर्ष के आगमन पर..(कँवल भारती)

ओमप्रकाश वाल्मीकि का होना – कँवल भारती (Kanwal Bharti)

कवि-कथाकार ओमप्रकाश वाल्मीकि का नाम हिन्दी दलित साहित्य आन्दोलन में अग्रणीय प्रतिष्ठापकों में लिया जाता है. वे सिर्फ एक लेखक भर नहीं हैं, बल्कि दलित साहित्य का एक जीवंत इतिहास है. वे हमारे दलित आन्दोलन के शुरूआती दौर के सक्रिय और जुझारू साथी हैं. हम दोनों ने लगभग एक ही समय 1970 के आसपास दलित साहित्य लिखना शुरू किया था. कानपूर के आर. कमल के … Continue reading ओमप्रकाश वाल्मीकि का होना – कँवल भारती (Kanwal Bharti)

हिन्दी दलित साहित्य – कॅंवल भारती

मोहनदास नैमिशराय की ‘हिन्दी दलित साहित्य’ पुस्तक को पढ़ते हूए यह साफ दिखाई देता है कि लेखक ने इसमें मेहनत बहुत की है, लोगों के बीच जा कर बहुत सारे ब्यौरे इकट्ठे किये हैं और उन्हें एक तरतीब दी है। यह अपने आप में एक बड़ा काम है। लेकिन फिर भी मुझे लगता है कि इस पुस्तक का लेखन इतिहास की शक्ल में होना चाहिए … Continue reading हिन्दी दलित साहित्य – कॅंवल भारती