दादरी का अख़लाक़ – राजेश जोशी की कविता

“दादरी का अख़लाक़” हर हत्या के बाद ख़ामोश हो जाते हैं हत्यारे और उनके मित्रगण. उनके दाँतों के बीच फँसे रहते हैं ताज़ा माँस के गुलाबी रेशे, रक्त की कुछ बूँदें भी चिपकी होती हैं होंठों के आसपास, पर आँखें भावशून्य हो जाती हैं जैसे चकित सी होती हों धरती पर निश्चल पड़ी कुचली-नुची मृत मानव देह को देखकर हत्या के बाद हत्यारे भूल जाते … Continue reading दादरी का अख़लाक़ – राजेश जोशी की कविता

दादरी हत्या : इकलाख की बेटी पूछ रही एक ही सवाल

इकलाख की बेटी रोते-रोते पिता की हत्या करने वालों से बस एक ही सवाल पूछ रही थी। वह बार कह रही थी, ‘कोई यह तो बताए कि आखिर मेरे अब्बू को मौत के घाट क्यों उतार दिया। मगर वहां उसके सवाल का जवाब देने वाला कोई नहीं था। परिवार के लोग भी यहीं कह रहे थे कि अब उनका क्या होगा। इकलाख स्वयं तो अधिक … Continue reading दादरी हत्या : इकलाख की बेटी पूछ रही एक ही सवाल