सार्वजनिक संस्थाओं को बेचने पर आमादा सरकारों से पूछा जाना चाहिए कि वो हैं किस लिए ? सिर्फ दलाली खाने के लिए? – Rakesh Kayasth

सरकारी तंत्र यानी नकारापन। प्राइवेट सेक्टर यानी अच्छी सर्विस और एकांउटिबिलिटी। यह एक आम धारणा है, जो लगभग हर भारतीय के मन में बैठी हुई है या यूं कहे बैठा दी गई है। लेकिन यह धारणा हर दिन खंडित होती है। किस तरह उसकी एक छोटी केस स्टडी आपके सामने रख रहा हूं। मेरे पड़ोसी ने एक ऐसे प्राइवेट बैंक से होम लोन लिया था, … Continue reading सार्वजनिक संस्थाओं को बेचने पर आमादा सरकारों से पूछा जाना चाहिए कि वो हैं किस लिए ? सिर्फ दलाली खाने के लिए? – Rakesh Kayasth

No cap on corporate funds to parties, suggest a way out, Govt tells Opposition

Parliament Thursday approved the Finance Bill, rejecting five amendments proposed a day earlier by Rajya Sabha on curtailing more powers to taxmen and capping corporate donations to political parties. The amendments, forced by the Opposition in Rajya Sabha where the government lacked majority, were negated by Lok Sabha and the Bill passed, completing the budgetary exercise for 2017-18. Defending the government’s stand to reject the … Continue reading No cap on corporate funds to parties, suggest a way out, Govt tells Opposition

मध्यम वर्ग कॉरपोरेट मीडिया द्वारा फैलाई जा रही छदम राष्ट्रवाद और युदौंमाद की धुन पर नाच रहा है – Pradeep Sharma

राजनीतिक असफलताओं को युद्ध की ओट से ढांका नहीं जा सकता .. यह विरोध जितना पाकिस्तान के लिए है उतना ही भारत या किसी भी राष्ट्र के लिए. इस तरह के राष्ट्रवाद की आज इस दुनिया को ज़रूरत नहीं है| सरकार की मंशा को बढ़ा-चढ़ाकर दिखाने और युद्धोन्माद फैलाने वाली भारतीय मीडिया अपराधी है | शांत बैठने को किसी ने नहीं कहा … . .१. … Continue reading मध्यम वर्ग कॉरपोरेट मीडिया द्वारा फैलाई जा रही छदम राष्ट्रवाद और युदौंमाद की धुन पर नाच रहा है – Pradeep Sharma

किसकी जेब के आठ लाख करोड़?- Qamar Waheed Naqvi

सरकारी बैंकों के क़र्ज़ों का महाघोटाला कोई एक-दो लाख करोड़ का मामला नहीं है. क़रीब साढ़े आठ लाख करोड़ रुपये के क़र्ज़े ऐसे हैं, जिनकी वसूली की सम्भावना अब न के बराबर समझी जा रही है! यानी भारत की कुल जीडीपी का क़रीब 6.7 प्रतिशत हिस्सा चट किया जा चुका है या जिसके वापस मिलने की अब लगभग उम्मीद नहीं है! और इनमें से 87 … Continue reading किसकी जेब के आठ लाख करोड़?- Qamar Waheed Naqvi

ज़ी न्यूज़ के नाम मेरा पत्र – विश्वदीपक

विश्वदीपक हम पत्रकार अक्सर दूसरों पर सवाल उठाते हैं लेकिन कभी खुद पर नहीं. हम दूसरों की जिम्मेदारी तय करते हैं लेकिन अपनी नहीं. हमें लोकतंत्र का चौथा खंभा कहा जाता है लेकिन क्या हम, हमारी संंस्थाएं, हमारी सोच और हमारी कार्यप्रणाली लोकतांत्रिक है ? ये सवाल सिर्फ मेरे नहीं है. हम सबके हैं. JNUSU अध्यक्ष कन्हैया कुमार को ‘राष्ट्रवाद’ के नाम पर जिस तरह … Continue reading ज़ी न्यूज़ के नाम मेरा पत्र – विश्वदीपक

पी. साईनाथ से एक खास मुलाकात

तीस्ता सेतलवाड : नमस्कार, कम्युनॅलिज़म कॉम्बैट की एक खास मुलाकात में आज हम मुलाकात करेंगे वरिष्ठ पत्रकार पी. साईनाथ से। पी. साईनाथ जी ३१ जुलाई तक द हिन्दू न्यूजपेपर के रूल अफेयर्स एडिटर थे। उनकी किताब एवरीबॉडी लव्स अ गुड ड्राउट को एक खास काम माना जाता हैं। आज हम उनसे मुलाकात करेंगे कॉर्पोटाईजेशन ऑफ़ मीडिया के बारे में और और कई अन्य सवाल। आज … Continue reading पी. साईनाथ से एक खास मुलाकात

नए वर्ष के आगमन पर..(कँवल भारती)

नया वर्ष तू क्या लेकर आया है? आशाएं विश्वास हमें तो करना ही है क्यों न करेंगे? करते ही आये हैं. वांच रहे हैं लोग राशियाँ राशिफल में कुछ के चेहरे मुरझाये हैं, कुछ के फिर भी खिले हुए हैं. आँखों देखा नहीं समझते, कागद लेखे सीस नवाते. पता नहीं क्यों विसराते हम इस यथार्थ को वृक्ष बबूल का बोएँगे तो आम कहाँ पाएंगे? बोएँगे … Continue reading नए वर्ष के आगमन पर..(कँवल भारती)