“कोका कोला कंपनी शुरू करनेवाला शिकंजी बेचनेवाला आदमी था।” – Nitin Thakur

‘कोका कोला कंपनी शुरू करनेवाला शिकंजी बेचनेवाला आदमी था।’ इस एक लाइन पर क्यों हंसा जा रहा है? क्या ये किसी अभूतपूर्व कामयाबी से भौंचक्की नैसर्गिक हंसी है? क्या ये ‘अमेरिका में भला कहां शिकंजी’ वाले अचरज से निकली हंसी है? या क्या ये राहुल को किसी भी कीमत पर पप्पू साबित करने के लिए चिढ़ाने का प्रयास करनेवाली हंसी है? जो भी हो एक … Continue reading “कोका कोला कंपनी शुरू करनेवाला शिकंजी बेचनेवाला आदमी था।” – Nitin Thakur

जहाँ बैलेट पेपर इस्तेमाल हो रहा है,वहाँ देशद्रोही नाक में दम क्यों कर दे रहे हैं? – Madhu Garg

उत्तर प्रदेश नगर निकाय चुनावों में भाजपा की भारी जीत की असलियत देखिये, कि ये लोग आख़िर कितने बड़े झूठे और बेईमान हैं। दोपहर से भाजपाई नेताओं औऱ मीडिया ने योगी मोदी का जो बावला राग गा रखा है।वो ना सिर्फ इनके नैतिक औऱ राजनीतिक चरित्र की पोल खोलता है ,बल्कि सच्चाई से सामना ना करने की हिम्मत रखने वाले घटिया औऱ निर्लज्ज लोगो के … Continue reading जहाँ बैलेट पेपर इस्तेमाल हो रहा है,वहाँ देशद्रोही नाक में दम क्यों कर दे रहे हैं? – Madhu Garg

Muslim Women’s organization calls BJP’s bluff

Bebaak Collective (Voices of the Fearless), have issued a  statement univocally condemning the comment made by the BJP leader Subramanian Swamy in an event in Mumbai on Friday, 27th October that the party could win in Uttar Pradesh elections because Muslim women believed that it was BJP who could save them from ‘triple talaq’. (See, “Muslim women felt only BJP could save them from triple … Continue reading Muslim Women’s organization calls BJP’s bluff

काँग्रेस+समाजवादी+वामपंथी- रामचंद्र गुहा की ‘फैंटेसी’ में छिपा भविष्य का रास्ता – Pankaj Srivastava ————————————————————–

  इलाहाबाद विश्वविद्यालय के दर्शनशास्त्र विभाग के नीम अंधेर कमरे में पहली बार यह शब्द-पद कान में पड़ा था- अमूर्त प्रत्यय ! वह बीए प्रथम वर्ष की कोई शुरुआती कक्षा थी। विज्ञान के विषयों से इंटरमीडिएट करके आने वाले मेरे जैसे छात्र के लिए इसका ठीक अर्थ समझने में कई साल लग गए। और जब थोड़ा- बहुत समझ आया तो पाया कि यह अपने किसी … Continue reading काँग्रेस+समाजवादी+वामपंथी- रामचंद्र गुहा की ‘फैंटेसी’ में छिपा भविष्य का रास्ता – Pankaj Srivastava ————————————————————–

गांधी और अंबेडकर के एक होने का वक्त आ गया है – Rakesh Kayasth

इतिहास के कुछ कालखंड निर्णायक होते हैं। हम एक ऐसे ही निर्णायक कालखंड में दाखिल हो चुके हैं। यह समय बीसवीं सदी के दो सबसे प्रखर बौद्धिक विचारों के एक होने का है। वो विचार जिन्हे हमेशा दो अलग ध्रुव माना गया और दोनो अलग-अलग रहे भी। ये विचार हैं, गांधीवाद  और अंबेडकरवाद। तीस के दशक में गांधी और अंबेडकर के बीच गहरा वैचारिक और … Continue reading गांधी और अंबेडकर के एक होने का वक्त आ गया है – Rakesh Kayasth

“परिवारवाद-जुमलावाद नहीं, इंसाफ के एजेंडे पर होगा चुनाव”-रिहाई मंच

लखनऊ, 04 जनवरी 2017। यूपी में परिवारवाद की जंग लड़ रही सपा द्वारा लोकतांत्रिक आवाजों के दमन और वादा खिलाफी के खिलाफ रिहाई मंच 16 जनवरी को लखनऊ में करेगा सम्मेलन। दस वर्ष पूर्व 16 जनवरी 2007 को रिहा हुए कोलकाता के आफताब आलम अंसारी की मां आयशा बेगम द्वारा रिहाई आंदोलन के एक दशक पूरा होने पर बरी बेगुनाह नौजवानों पर एक पुस्तक जारी … Continue reading “परिवारवाद-जुमलावाद नहीं, इंसाफ के एजेंडे पर होगा चुनाव”-रिहाई मंच