गांधी, चार्ली, चर्चिल और मशीन -3 (Nitin Thakur)

1931 में जब चार्ली चैप्लिन गांधी से मिल रहे थे तब उन्हें बाज़ार में बढ़ते मशीनीकरण के नुकसानों का उतना अंदाज़ा नहीं था। दुनिया बहुत तेज़ी के साथ मशीनों पर निर्भर होती जा रही थी। पहले विश्वयुद्ध के बाद बर्बाद हुए देश तेज़ी से खड़े होने के लिए मशीनों पर सवार थे और जर्मनी उनमें सबसे आगे था। अंग्रेज़ों ने भी मैनचेस्टर में मशीनों से … Continue reading गांधी, चार्ली, चर्चिल और मशीन -3 (Nitin Thakur)

गांधी, चार्ली, चर्चिल और मशीन -2 (Nitin Thakur)

चार्ली चैप्लिन महात्मा गांधी से मिलना चाहते थे जिसके लिए कैनिंग टाउन में डॉक्टर चुन्नीलाल कतियाल के यहाँ 22 सितम्बर 1931 की शाम का वक्त तय हुआ। खुद चैप्लिन ने इस रोचक मुलाकात को आत्मकथा में सहेजा है। उस वक्त का एक फोटो रिकॉर्ड्स में मिलता है जिसमें गांधी गाड़ी से बाहर आ रहे हैं और उन्हें लोगों ने चारों तरफ से घेर रखा है। … Continue reading गांधी, चार्ली, चर्चिल और मशीन -2 (Nitin Thakur)

गांधी, चार्ली, चर्चिल और मशीन -1 ( Nitin Thakur)

साल 1936 में जर्मनी ओलंपिक खेलों का मेजबान था। एडोल्फ हिटलर के लिए ये मौका था जब वो दिखा सकता था कि अट्ठारह साल पूर्व पहली आलमी लड़ाई में हार चुका जर्मनी फिर से उठ खड़ा हुआ है। इन खेलों के सहारे वो जर्मनों की शर्मिंदगी को आत्मविश्वास में तब्दील कर डालना चाहता था। उसने टीवी नाम की मशीन का इस्तेमाल किया और पहली बार … Continue reading गांधी, चार्ली, चर्चिल और मशीन -1 ( Nitin Thakur)

Gandhi did not dream of India that was rich or powerful, but of an India that was fair and just

He looked rather like this, 68 years ago, to his assassin. He looked straight into his eyes, quite exactly like this. Gandhi was walking, of course, not standing. And he walked straight into those three bullets. He embraced those darts, he did. With the might of his pain for others, the depth of his faith in God, he hugged them. He had fought for years … Continue reading Gandhi did not dream of India that was rich or powerful, but of an India that was fair and just