Breaking The Cycle of Chronic Dissatisfaction

Do you find yourself constantly chasing one goal after the other? Is it difficult for you to savor happy moments and rest in them? Do you immediately worry about the next problem once the previous one is solved? Are you constantly worried about something or the other? If you answered yes to most of these questions, chances are, you are chronically dissatisfied. Something gnaws at … Continue reading Breaking The Cycle of Chronic Dissatisfaction

बेटियों से मुँह चुराते प्रधानमंत्री पर एक सांस्कृतिक चिट्ठा -कश्यप किशोर मिश्र

मर्दानगी क्या होती है ? यह जनाना या स्त्रैण से कितनी अलग होती है ? हाँलाकि यह एक सामाजिक सवाल है पर इसके राजनीतिक जवाब की तलाश करें तो तलाश की सुई भारतीय जनता पार्टी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की ओर मुड़ जाती है । राजनीतिक मर्दवाद को सामाजिक मर्दवाद की मर्यादा बना देने का उदाहरण इस मुल्क नें जय गंगा मईया को नमामि गंगे … Continue reading बेटियों से मुँह चुराते प्रधानमंत्री पर एक सांस्कृतिक चिट्ठा -कश्यप किशोर मिश्र

आपके मर्यादापुरुषोत्तम आपको मुबारक – Dilip Mandal

महान शूद्र विद्वान और तपस्वी शंबूक की हत्या करने वाला मेरे लिए मर्यादापुरुषोत्तम नहीं है। अगर वह आपका मर्यादापुरुषोत्तम है, तो यह आपकी आज़ादी है। मुझे अपना मर्यादापुरुषोत्तम चुनने की आज़ादी संविधान देता है। देखें अनुच्छेद 15 और 25. इसी आज़ादी के तहत शंबूक वध की निंदा करने वाली सैकड़ों किताबें छपी हैं, नाटक लिखे गए हैं, कविताएँ लिखी गई हैं, लिखी जा रही हैं। … Continue reading आपके मर्यादापुरुषोत्तम आपको मुबारक – Dilip Mandal

Butter Tea ruminations at Norbulingka – Rukmini Sen

Photo Credit: Rukmini Sen It was raining ferociously when we reached our hotel somewhere between Mcleodganj and Dharamkot on the evening of fourth of July. We advised ourselves to stay indoors. You don’t step out on a rainy night in a terrain you don’t understand. My partner Suresh and I had settled for the TV show “The Durrells (based on “The Corfu Trilogy” by Gerald … Continue reading Butter Tea ruminations at Norbulingka – Rukmini Sen

राम की शक्तिपूजा में पूरा सामन्तवाद है – कॅंवल भारती

बुद्ध ने अपने भिक्षुओं को हिदायत दी थी कि वे कभी भी उनके वचनों को छांदस (उस समय की सामन्ती भाषा) में न लिखें। निराला ने ‘राम की शक्ति पूजा’ छांदस हिन्दी (सामन्ती भाषा) में क्यों लिखी? उन्होंने नागार्जुन की तरह जनभाषा में कविता की रचना क्यों नहीं की? क्या इससे यह साबित नहीं होता कि निराला के सारे संस्कार सामन्ती थे? भाषा से ही … Continue reading राम की शक्तिपूजा में पूरा सामन्तवाद है – कॅंवल भारती

PUCL condemns Afzal Guru’s hanging in New Delhi

The People’s Union for Civil Liberties has condemned the hanging of Afzal Guru. Afzal Guri was hanged in Tihar Jail early in the morning of Nineth February (9.2.2013). Hille Le is publishing the entire statement here for you to read- “The tearing hurry with  which Afzal Guru was hanged, accompanied by the flouting of all established norms by not giving his family their legal right to meet … Continue reading PUCL condemns Afzal Guru’s hanging in New Delhi