हमारा चयन, हमारी प्राथमिकताएं और हमारी राजनीति – रुक्मिणी सेन

दुर्गा वाहिनी की रजनी ठुकराल कहती हैं, कि गलत परम्पराएं डाल रही महिलाओं का बहिष्कार होना चाहिए। रजनी के मुताबिक, दीपिका पादुकोण ने, वोग के वीडियो में अपनी यौनिकता के बारे में बात करते हुए (जिसे केरसी खम्भाटा ने लिखा), एक गलत परम्परा की शुरुआत की है। महिलाओं के सशक्तिकरण और उनके चुनाव (choice) पर गंभीर बहस करना असम्भव है, जब दुर्गा वाहिनी इसी प्रकार … Continue reading हमारा चयन, हमारी प्राथमिकताएं और हमारी राजनीति – रुक्मिणी सेन

अधूरा कोई नहीं – आर. अनुराधा

      सुनती हूं बहुत कुछ जो लोग कहते हैं असंबोधित कि अधूरी हूं मैं- एक बार अधूरी हूं मैं- दूसरी बार क्या दो अधूरे मिलकर एक पूरा नहीं होते? होते ही हैं चाहे रोटी हो या मेरा समतल सीना और अधूरा आखिर होता क्या है! जैसे अधूरा चांद? आसमान? पेड़? धरती? कैसे हो सकता है कोई इंसान अधूरा!   जैसे कि केकड़ों की … Continue reading अधूरा कोई नहीं – आर. अनुराधा