कुछ भी मारो बस आँख मत मारो – बोधिसत्व

  (मर्यादावादियों के लिए एक नया राष्ट्रगान) गोरक्षक बन कर मारो गोमांस के नाम पर मारो काश्मीर में सरकार बन कर मारो बेरोजगारी से मारो बेरोजगार की मारो मंदिर के नाम पर मारो बस आँख मत मारो। नोट बंद कर मारो लाइन में लगा कर मारो कर्ज से किसान मारो बोल वचन से मारो हंस कर और हंसा कर मारो उल्टे सीधे फंसा कर मारो … Continue reading कुछ भी मारो बस आँख मत मारो – बोधिसत्व

आर्यवर्त की सजग सरकार-बोधिसत्व

  तभी अचानक सावन के दिव्य महीने में सर्वथा नूतन सरकार ने … एक नया नवेला नियम बनाया घर में दफ्तर में बाजार में रात दिन दोपहर मे नदी नाले नहर में डूब कर या खा कर जहर जो जान गवांएगा ऐसा आत्म हत्यारा देश के लिए शहीद माना जाएगा ऐसे आत्म बलिदानियों की भव्य समाधि बनेगी नगर चौक पर मूर्ति बिठाई जाएगी जन कवियों … Continue reading आर्यवर्त की सजग सरकार-बोधिसत्व