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विश्लेषण: मैं राहुल गाँधी को गंभीरता से क्यों लेना चाहता हूँ?

संघर्ष और नाकामी का इतना लंबा दौर झेलकर मैदान में बने रहने के लिए जो मानसिक मजबूती चाहिए वो कितने राजनेताओं में है? भारत में कोई दूसरा ऐसा राजनेता नहीं है जो पत्रकार और पेशेवर ट्रोल्स की भीड़ में जाकर उनकी बातें सुने और सवालों के जवाब दे। कोई ऐसा राजनेता नहीं है, जो अपनी गलतियाँ सार्वजनिक तौर पर स्वीकार करे और सीखने की कोशिश … Continue reading विश्लेषण: मैं राहुल गाँधी को गंभीरता से क्यों लेना चाहता हूँ?

तुम अगर वोट देने का वादा करो

तुम अगर वोट देने का वादा करो  मैं यूं ही मस्त जुमले सुनाता रहूं ।  तुम मुझे देखकर सिर हिलाते रहो  मैं तुम्हें देखकर बड़बड़ाता रहूं ।मैंने हाँकी हैं गप्पे हजारों मगर इक शिकन तेरे माथे पे आई नहीँ ।  बेच डाला है मैंने सुनहरा वतनएक उंगली भी तुमने उठाई नहीँ ॥  तुम अगर अपनी गर्दन झुकाए रहो मैं छुरी पीठ पीछे चलाता रहूं ॥कोई हिन्दू मुसलमां … Continue reading तुम अगर वोट देने का वादा करो

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VIRAL FILM: FIR Attack

A Film by Debalina Mow On 22nd December, Feminists in Resistance (an autonomous feminist collective in Kolkata) held a mobile campaign from Ganguly Bagan to Baghajatin (refugee colony areas in South Kolkata). At 10pm as they reached Baghajatin I block, and were packing up, a group of 7-8 men, their faces masked with handkerchiefs and saffron tilaks on their foreheads, attacked the protesters with huge … Continue reading VIRAL FILM: FIR Attack

वो तय करेंगे- आप संदिग्ध हैं, देशद्रोही हैं-मसीहुद्दीन संजरी

लोकसभा चुनावों में 23 मई 2019 को भाजपा की प्रचंड जीत का एलान हुआ। आतंक की आरोपी साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर को भाजपा ने भोपाल सेअपना प्रत्याशी बनाया जिन्होंने कांग्रेस के  नेता दिग्विजय सिंह को भारी मतों से पराजित कर कानून बनाने वाली देश की सबसे बड़ीपंचायत में पदार्पण किया। मोदी के दोबारा सत्ता में आने के साथ ही सरकार आतंकवाद पर ‘सख्त’ हो गयी। पहले से ही दुरूपयोग के लिए विवादोंमें रहे पोटा कानून के स्थान पर कांग्रेस सरकार ने 2004 में नए रूप में गैरकानूनी गतिविधियां (निरोधक) अधिनियम पेश किया था। प्रधानमंत्रीनरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में कैबिनेट की बैठक में इसी में दो और संशोधन लाने का फैसला किया गया। खबरों के अनुसार पहला संशोधन किसीव्यक्ति को आतंकवादी घोषित करने के लिए उसके किसी संगठन से जुड़े होने की बाध्यता को समाप्त करता है और दूसरा एनआईए को किसी भी व्यक्ति को आतंकी होने के संदेह पर गिरफ्तार करने की शक्ति प्रदान करता है।  गिरफ्तार किए गए व्यक्ति को तभी ज़मानत मिल सकती है जब वह खुद को अदालत में बेगुनाह साबित कर दे। अब तक एनआईए को किसी व्यक्ति को आतंकवादी साबित करने के लिए तमाम अन्य साक्ष्यों केअलावा उसके किसी आतंकी संगठन से जुड़ाव के सबूत भी अदालत को देने होते थे लेकिन अब उसे इस जंजाल से मुक्त कर दिया जाएगा। राजनीतिक उद्देश्यों और राजनेताओं के खिलाफ पोटा के दुरूपयोग के आरोपों के चलते 2004 में पोटा को खत्म कर 1967 में बने यूएपीए मेंआतंकवाद से सम्बंधित प्रावधानों को शामिल कर उसे नया रूप दिया गया था। शुरू में यूएपीए में शामिल आतंकवाद सम्बंधित पोटा के तीन कठोरप्रावधानों को शिथिल या खत्म कर दिया गया था। पोटा के अंतर्गत शामिल ज़मानत पाने के कड़े प्रावधानों को निकाल दिया गया था।  पंद्रह दिनोंकी पुलिस हिरासत को हटा दिया गया था और पुलिस के सामने दिए गए बयान के अदालत में स्वीकार्य होने की बाध्यता खत्म कर दी गई थी।लेकिन बाद में होने वालो संशोधनों में इनमें से दो प्रावधानों को फिर से और कठोर बना दिया गया।  पुलिस के सामने दिए गए बयान अब भीअदालतों में स्वीकार्य नहीं हैं लेकिन साथ में आरोपों को गलत साबित करने का बोझ कैद में जा चुके आरोपी पर होने और ज़मानत कीसंभावनाओं के खत्म हो जाने के बाद इस अस्वीकार्यता के बहुत मायने नहीं रह जाते। प्रस्तावित संशोधन में आतंकवाद पर प्रहार की बात की गईहै। हालांकि सच यह भी है कि यूएपीए के प्रावधानों का प्रयोग असहमति के स्वरों को कुचलने के लिए भी किया जाता रहा है। गत वर्ष दिल्लीऔर मुम्बई से अर्बन नक्सल के नाम पर प्रतिष्ठित सामाजिक कार्यकर्ताओं, पत्रकारों, कवियों, शिक्षक और वकीलों की गिरफ्तारियां इसी की ताजा कड़ी है। नए संशोधन के बाद आतंकवाद, … Continue reading वो तय करेंगे- आप संदिग्ध हैं, देशद्रोही हैं-मसीहुद्दीन संजरी

In Ballia In 1981 To Cover the Rape of a Young Dalit Girl

SEEMA MUSTAFA | 31 MAY, 2019     It was 1981. I was a cub reporter in the Indian Express covering crime, plus everything else that took my fancy. It was a delightful period, post Emergency when journalism and journalists were charged with new passion, a “we will not allow any government interference” mood. The Indian Express was a reporters newspaper, never really belonging to … Continue reading In Ballia In 1981 To Cover the Rape of a Young Dalit Girl

थोड़ी सिफारिश कर दो डियरअक्षय! – Darain Shahidi

डियर अक्षय , कैसे हो ?वो क्या है कि नॉर्थ ईस्ट में एक समुदाय के लोगों की नागरिकता पर संदेह पैदा कर दिया गया है।नंबर टू कहते हैं कि हिन्दू बुद्ध और सिख के अलावा सबको देश से बाहर कर देंगे। थोड़ी सिफारिश कर दो भाई। थोड़ा पोलिटिकल होगा लेकिन ये “positive news” बन जाएगी। बाकी तुम्हारी तो मौज ही मौज है कनाडा में हिंदु … Continue reading थोड़ी सिफारिश कर दो डियरअक्षय! – Darain Shahidi

Hillele report: Times of India कि लोकतंत्र के ख़िलाफ़ ‘सुपारी पत्रकारिता’

#TimesofIndia #SoniaGandhi #AssetsofCongress टाइम्स ऑफ इंडिया, लखनऊ संस्करण में एक विशेष पन्ना, चौथे पेज पर ‘Dance of Democracy’ और उस पर बिग बॉटम में (तस्वीर में देखें) ये ख़बर, जो बता रही है कि ‘पिछले 5 सालों में सोनिया गांधी की सम्पत्ति 21 फीसदी बढ़ी, जिसमें इटली में उनकी पारिवारिक सम्पत्ति में हिस्सा भी शामिल है।’ इस ख़बर में लिखा गया था कि सोनिया की … Continue reading Hillele report: Times of India कि लोकतंत्र के ख़िलाफ़ ‘सुपारी पत्रकारिता’

Journalist bodies condemn moves to muzzle the media

Indian Press Club of India ,  Indian Women’s Press Corps  and Press Association have issued a strongly worded statement against central Government’s moves to muzzle the media . The statement says- ” We, the undersigned journalist organisations express deep concern at the statements made by the Hon’ble Attorney General of India insinuating that reports on the Rafale deal published in The Hindu newspaper were based … Continue reading Journalist bodies condemn moves to muzzle the media