बच्चा-बच्चा राम का, जन्मभूमि के काम का – Mayank Saxena

बच्चा-बच्चा राम का, जन्मभूमि के काम का ये नारा लगाने वालों के बच्चे कॉन्वेंट में पढ़ रहे हैं…न कि शिशु मंदिर में…जिनके बड़े हो गए, वे स्वयंसेवक या कारसेवक नहीं हैं…आईटी कम्पनियों में हैं…विदेश में हैं…हिंदी और संस्कृत नहीं, अंग्रेज़ी बोलते हैं…धोती नहीं, स्मार्ट केसुअल्स पहनते हैं…और माता-पिता के पैर तो सुबह उठ कर नहीं ही छूते हैं… तय मानिए, वह न राम के हैं, … Continue reading बच्चा-बच्चा राम का, जन्मभूमि के काम का – Mayank Saxena

नब्बे साल के मेरे चाचा जी के पुराने किस्से – हिमांशु कुमार

कल अपने चाचा जी के पास बैठा था, वो पुराने किस्से सुनाने लगे, चाचा जी ने मुझे बताया कि सन चालीस के लगभग की बात है, एक बार तेरे दादा जी मुज़फ्फर नगर में घर के सामने बैठे थे, तभी दुल्ला कसाई एक लंगड़ी गाय लेकर जा रहा था, हमारे घर की भैंस कुछ दिन पहले मर चुकी थी, घर में दूध की दिक्कत थी, … Continue reading नब्बे साल के मेरे चाचा जी के पुराने किस्से – हिमांशु कुमार

अखंड भारत चाहिए कि नहीं चाहिए?- Dilip Mandal

अखंड भारत में तीनों देशों को मिलाकर मुसलमान लगभग 50 करोड़, SC-ST लगभग 25 करोड़, सिख और ईसाई मिलाकर लगभग 6 करोड़ और बाकी 60 करोड़ लोग होंगे. सवर्ण हिंदू, OBC, बौद्ध, जैन, पारसी इसी 60 करोड़ में शामिल हैं. कुछ कम – ज्यादा होगा. यह सब जनगणना के अनुसार है. गलत है, तो बताएं कि सही क्या है. तो बोलिए प्रेम से… अखंड भारत … Continue reading अखंड भारत चाहिए कि नहीं चाहिए?- Dilip Mandal