हमको कभी माफ़ मत करना, तबरेज़- Mayank Saxena

  दो दिन हुए, तबरेज़ की पिटाई का वीडियो न जाने कितने ही लोगों ने भेजा…देखने की हिम्मत जुटाना मुश्किल था…और फिर आज एक दोस्त से बात हुई और वहां से जवाब आया, “मुसलमान के लिए अब इस मुल्क़ में कोई जगह नहीं…तुम लोग जो चाहें कोशिश कर लो, अब इस मुल्क़ के ज़्यादातर हिंदू, हमारे ख़िलाफ़ हैं…हम बस चुपचाप पंचर बनाते रहें और ज़िंदगी … Continue reading हमको कभी माफ़ मत करना, तबरेज़- Mayank Saxena

The Day It All Came Down – Sehba Imam

I was such an idealist in 1992, that you could call me a dumb idiot. My friend Vismita and I were hired to conduct film making workshops for teenage girls in a village. We were giving our hearts and souls to our work. We were changing the gender dynamics in the world, one teenage girl at a time. After an exhausting day at Meethapur village, … Continue reading The Day It All Came Down – Sehba Imam

बच्चा-बच्चा राम का, जन्मभूमि के काम का – Mayank Saxena

बच्चा-बच्चा राम का, जन्मभूमि के काम का ये नारा लगाने वालों के बच्चे कॉन्वेंट में पढ़ रहे हैं…न कि शिशु मंदिर में…जिनके बड़े हो गए, वे स्वयंसेवक या कारसेवक नहीं हैं…आईटी कम्पनियों में हैं…विदेश में हैं…हिंदी और संस्कृत नहीं, अंग्रेज़ी बोलते हैं…धोती नहीं, स्मार्ट केसुअल्स पहनते हैं…और माता-पिता के पैर तो सुबह उठ कर नहीं ही छूते हैं… तय मानिए, वह न राम के हैं, … Continue reading बच्चा-बच्चा राम का, जन्मभूमि के काम का – Mayank Saxena

Yet another encounter with corporate media censorship

Mumbai, 4 April-2004, Anand Patwardhan: This morning the shocking Cobrapost story broke that in 1990 when the Babri Mosque was first attacked, top Sangh parivar leaders had deliberately planned to get some Hindu karsevaks killed in order to enrage and mobilize Hindus. The sting on major players from the BJP, VHP, Shiv Sena and other affiliated groups also revealed that the demolition of the Babri Mosque in 1992 … Continue reading Yet another encounter with corporate media censorship

काली आंधियां रामराज्य के इसी जघन्य अपराध और पाप के कारण चल रही हैं!

  झंझावत। काली आंधियां। वन-प्रांतरों में मचता कोहराम। इधर-उधर विक्षित्प से भागते वन्य जीव। इतना अधिक क्रन्दन और चीख-पुकार। अदीब ने दोनों कानों पर हाथेलियां रख के अपने श्रवण स्रोत बंद कर लिए और चीखा-महमूद! कोई उत्तर नहीं आया। वह फिर चीख़ा, फिर भी उसे कोई जवाब तो नहीं मिला, पर देखा, सामने से गिरता-पड़ता-हांफता महमूद आ रहा है। कहां थे तुम? हुज़ूर….मैं पिछली सदियों … Continue reading काली आंधियां रामराज्य के इसी जघन्य अपराध और पाप के कारण चल रही हैं!