I am returning my Awards because I am deeply concerned and ashamed of what this government is doing to this country and to its own people – Pradip Kishen

I don’t work or perhaps even think as a film maker any more. But many years ago, someone in their folly or wisdom thought to give 2 of the films I made National Awards. Today, in solidarity with the students of the FTII who are being bullied and humiliated into accepting 3rd rate people to preside over their destinies, I wish to return these 2 … Continue reading I am returning my Awards because I am deeply concerned and ashamed of what this government is doing to this country and to its own people – Pradip Kishen

जला कर मारने, गोली से उड़ा देने या नरसंहार के लिए ‘असहिष्‍णुता’ (इनटोलरेंस) सही शब्‍द नहीं है – अरुंधति राय

हालांकि, मैं नहीं मानती कि कोई अवॉर्ड हमारे काम को आंकने का सही पैमाना है। मैं लौटाए गए अवॉर्ड्स की सूची में 1989 में प्राप्‍त नेशनल अवॉर्ड (बेस्‍ट स्‍क्रीनप्‍ले के लिए) को भी शामिल करती हूं। मैं यह साफ कर देना चाहती हूं कि मैं यह अवॉर्ड इसलिए नहीं लौटा रही क्‍योंकि मैं उस बात से आहत हूं जिसे ‘बढ़ती कट्टरता’ कहा जा रहा है … Continue reading जला कर मारने, गोली से उड़ा देने या नरसंहार के लिए ‘असहिष्‍णुता’ (इनटोलरेंस) सही शब्‍द नहीं है – अरुंधति राय

Why I am returning my award – Arundhati Roy

Although I do not believe that awards are a measure of the work we do, I would like to add the National Award for Best Screenplay that I won in 1989 to the growing pile of returned awards. Also, I want to make it clear that I am not returning this award because I am “shocked” by what is being called the “growing intolerance” being fostered by … Continue reading Why I am returning my award – Arundhati Roy

हम अन्याय को संस्थाबद्ध करते जा रहे हैं – अरुंधति रॉय

‘कायर बुद्धिजीवियों’ का देश बन जाने का ख़तरा’ (लीजिए, हिंदी में पढ़िये अरुंधति का इंटरव्यू। गोरखपुर फ़िल्म फ़ेस्टिवल के दौरान 23 मार्च को मशहूर लेखिका अरुंधति रॉय से हुई मेरी बातचीत अंग्रेज़ी पाक्षिक “गवर्नेंस नाऊ” में छपी है। लेकिन जब लोग यह जान गये हैं कि यह साक्षात्कार हिंदी में लिया गया था तो सभी मूल ही सुनना-पढ़ना चाहते हैं। इससे साबित होता है कि … Continue reading हम अन्याय को संस्थाबद्ध करते जा रहे हैं – अरुंधति रॉय

न्याय और सुरक्षा के मुद्दे संघर्षों की दिशा तय करेंगे – Sudhir Suman

Photo: Mukul Dube     Photo: Mukul Dube   अनिल सिन्हा मेमोरियल फाउंडेशन की ओर से इंडिया इस्लामिक सेंटर में आयोजित दूसरे सालाना आयोजन में ‘मैपिंग एंगर: स्पाॅन्टेनियस प्रोटेस्ट ऐंड कम्पिलिसीट साइलेंस’ विषय पर जानी मानी एक्टिविस्ट लेखिका अरुंधति राय और पत्रकार अमित सेन गुप्ता के बीच विचारोत्तेजक बातचीत हुई। अमित ने शुरुआत बांग्ला देश से की, जहां आजकल 1971 में जनसंहार, बलात्कार और उत्पीड़न … Continue reading न्याय और सुरक्षा के मुद्दे संघर्षों की दिशा तय करेंगे – Sudhir Suman