“ये लौंडे कैदियों का कई रात ‘काम चला’ सकते हैं”,कहा अनिल दिक्षित ने

दक्षिणपंथी राजनीति हो या वामपंथी राजनीति बलात्कार का समर्थन क्या कोई सभ्य समाज का मनुष्य कर सकता है? पूर्व पत्रकार, वर्तमान हिंसक मनोरोगी! भाषा, किसी भी संस्कृति का अहम चिह्न है और इस लिहाज से वैसे भी संघ और उसके हिंदुत्व के समर्थकों की भाषा, लगातार उनकी संस्कृति की पहचान रही है। पिछले 30 सालों में आरएसएस या विहिप से जुड़े कट्टरपंथी-विक्षिप्त लोग, लगातार मीडिया … Continue reading “ये लौंडे कैदियों का कई रात ‘काम चला’ सकते हैं”,कहा अनिल दिक्षित ने