अक्षरधाम मामले में बरी हुए आरोपियों को मुआवजा देने से इंकार करना न्यायिक साम्प्रदायिकता का ताजा उदाहरण

लखनऊ 8 जुलाई 2016। रिहाई मंच ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा अक्षरधाम मंदिर हमला मामले में सालों जेल में रहने के बाद बरी हुए लोगों को मुआवजा देने से मना करने को न्यायिक अन्याय करार देते हुए इसे न्यायप्रणाली मंे लोगों के विष्वास   को तोड़ने वाला फैसला बताया है। मंच ने कहा है कि ऐसे फैसले यह साबित करते हैं कि भारतीय न्याय व्यवस्था में किस … Continue reading अक्षरधाम मामले में बरी हुए आरोपियों को मुआवजा देने से इंकार करना न्यायिक साम्प्रदायिकता का ताजा उदाहरण