खुल गई नाव – अज्ञेय

खुल गई नाव घिर आई संझा, सूरज डूबा सागर-तीरे। धुंधले पड़ते से जल-पंछी भर धीरज से मूक लगे मंडराने, सूना तारा उगा चमक कर साथी लगा बुलाने। तब फिर सिहरी हवा लहरियाँ काँपीं तब फिर मूर्छित व्यथा विदा की जागी धीरे-धीरे। स्वेज अदन (जहाज में), 5 फरवरी, 1956 Continue reading खुल गई नाव – अज्ञेय

जो पुल बनाएंगे बन्दर कहलाएंगे – अज्ञेय

  जो पुल बनाएंगे वे अनिवार्यत: पीछे रह जाएंगे। सेनाएँ हो जाएंगी पार मारे जाएंगे रावण जयी होंगे राम, जो निर्माता रहे इतिहास में बन्दर कहलाएंगे Continue reading जो पुल बनाएंगे बन्दर कहलाएंगे – अज्ञेय