#MeToo पर रुक्मिणी सेन: मेरे यौन उत्पीड़न मामले में इंडिया टुडे के अरुण पुरी ने कुछ नहीं किया!

मेरे यौन उत्‍पीड़न के केस में एक साल तक इंडिया टुडे के अरुण पुरी ने कुछ नहीं किया। यह बात 2012-13 की है। इंडिया टुडे को पूरा एक साल लग गया एक ‘बेईमान’ कमेटी बनाने में जिसमें अंत तक अनिवार्य प्रावधान के मुताबिक कोई बाहरी सदस्‍य शामिल नहीं किया। यह ऐसा सदस्‍य होना था जो वकालत के क्षेत्र में या तो मशहूर हो या फिर … Continue reading #MeToo पर रुक्मिणी सेन: मेरे यौन उत्पीड़न मामले में इंडिया टुडे के अरुण पुरी ने कुछ नहीं किया!

चैनलों को ‘सिंगल आउट’ करके मीडिया को यह संकेत दिया गया है कि उन्हें ‘समय के साथ’ कैसे चलना चाहिए! – QW Naqwi

असम के भी एक चैनल पर एक दिन की रोक लगायी गयी है. यात्रा पर हूँ, इसलिए देर से लिख रहा हूँ. हालाँकि देखा कि इस मुद्दे पर सोशल मीडिया में ज़्यादा कुछ नहीं कहा गया. लेकिन मामला गम्भीर है और NDTV के मामले की ही अगली कड़ी है. अब यह साफ़ हो गया है कि जिस तरह की ‘संवेदनशील’ जानकारियाँ उजागर करने के लिए … Continue reading चैनलों को ‘सिंगल आउट’ करके मीडिया को यह संकेत दिया गया है कि उन्हें ‘समय के साथ’ कैसे चलना चाहिए! – QW Naqwi

Abhisar Sharma to Srivastava and CBI: Bring it on

The scourge of the social media is at it again. This time quoting from a website pretending to be neutral and saying that the Central Bureau of Investigation is going to register a First Information Report (FIR) against my wife, Shumana Sen. The allegations speak of a man called SK Srivastava who has been fighting a “brave” battle against me and my wife and another … Continue reading Abhisar Sharma to Srivastava and CBI: Bring it on

पत्रकारिता के ‘चारणयुग’ में अंजना ओम कश्यप के राजनाथ से सवाल !

तमाम शहरों और सूबों की राजधानियों में ऐसे कुछ पत्रकार पाये जाते हैं जिनका काम डीएम से लेकर सीएम तक की प्रेसकान्फ्रेंस को हल्का-फुल्का बनाना होता है। मसलन वे बड़ी मासूमियत से कुछ इस तरह के सवाल पूछते हैं- “सर, आप पर इतना बोझ है, आखिर आपमें इतना स्टैमिना कहाँ से आता है ?” “आप पर ऐसे-ऐसे आरोप लगते हैं, लेकिन आप हमेशा मुस्कराते कैसे रहते हैं ?” “आपको … Continue reading पत्रकारिता के ‘चारणयुग’ में अंजना ओम कश्यप के राजनाथ से सवाल !

इंडिया में IPL, भारत में सूखा! – क़मर वहीद नक़वी

By: Qamar Waheed Naqvi देश का चालीस प्रतिशत भूभाग, दस राज्य और ढाई सौ से ज़्यादा ज़िले अगर सूखे की भयंकर चपेट में हैं और देश में इस पर कहीं कोई चिन्ता नहीं, चर्चा भी नहीं तो हैरानी क्या? शहर को सूखे का मतलब तो तब समझ में आयेगा, जब आटा, दाल, चावल, सब्ज़ियाँ अचानक से और महँगी हो जायें, नलों में पानी कम आने … Continue reading इंडिया में IPL, भारत में सूखा! – क़मर वहीद नक़वी

Mar 26 काँग्रेस : बस ‘टीना’ में ही जीना – क़मर वहीद नक़वी By: Qamar Waheed Naqvi

प्रशान्त किशोर ने काँग्रेस को एक ‘क्विक फ़िक्स’ फ़ार्मूला दिया है. ब्राह्मणों को पार्टी के तम्बू में वापस लाओ. फ़ार्मूला सीधा है. जब तक ब्राह्मण काँग्रेस के साथ नहीं आते, तब तक उत्तर प्रदेश में मुसलमान भी काँग्रेस के साथ नहीं आयेंगे. क्योंकि मुसलमान तो उधर ही जायेंगे, जो बीजेपी के ख़िलाफ़ जीत सके. मायावती के कारण अब दलित तो टूटने से रहे. तो कम … Continue reading Mar 26 काँग्रेस : बस ‘टीना’ में ही जीना – क़मर वहीद नक़वी By: Qamar Waheed Naqvi

ताकि रोज़ का यह टंटा ख़त्म हो!- क़मर वहीद नक़वी

राग देश  | क़मर वहीद नक़वी By: Qamar Waheed Naqvi दिल्ली में जेएनयू के मामले पर और हरियाणा में आरक्षण के मुद्दे पर जो कुछ हुआ, उसके संकेत एक बड़ी चेतावनी हैं. हरियाणा में चुन-चुन कर जैसे ग़ैर-जाटों को निशाना बनाया गया, वह भयानक था. देश भीतर-भीतर कितना बँट चुका है, कैसी नफ़रतें पसर चुकी हैं? देश को इस भीड़तंत्र में बदल देने का जुआ बहुत … Continue reading ताकि रोज़ का यह टंटा ख़त्म हो!- क़मर वहीद नक़वी

आप किन आतंकियों को ढूंढ रहे हैं? ये आतंकी खुले घूम रहे हैं..

Written by मयंक सक्सेना | Published on: February 23, 2016 जिन दिल्ली के तीन आतंकियों के बारे में आज तक-इंडिया टुडे द्वारा किए गए  स्टिंग ऑपरेशन और मेरा लेख बात करेगा, वे दिल्ली की अलग-अलग अदालतों में काम करते हैं।  इनके कपड़े वकीलों की तरह हैं। लेकिन  ये वकील संविधान सम्मत न्याय के लिए नहीं लड़ते हों. ये तीनों ठीक उन भाड़े के गुंडो के … Continue reading आप किन आतंकियों को ढूंढ रहे हैं? ये आतंकी खुले घूम रहे हैं..

Feb 13 निशानची बहसों के दौर में!- क़मर वहीद नक़वी

14 अगस्त 2015 को आसिया अन्दराबी ने पाकिस्तान का स्वतंत्रता दिवस मनाया और लश्कर-ए-तय्यबा के आतंकवादियों को फ़ोन पर सम्बोधित भी किया, तब तो ऐसा कोई हंगामा नहीं हुआ. आठ महीने पहले जम्मू में भिंडरावाले का ‘शहीदी दिवस’ मनाने के लिए पोस्टर लगाना देशद्रोह नहीं था क्या? तब वहाँ ख़ालिस्तान और पाकिस्तान समर्थक नारे भी लगे. क्या वह देशद्रोह नहीं था? दोनों ही घटनाओं के समय … Continue reading Feb 13 निशानची बहसों के दौर में!- क़मर वहीद नक़वी

शुभ नहीं हैं 2016 के संकेत!

Nov 07 बिहार में सबकी साँस अटकी है! क्योंकि इस चुनाव पर बहुत कुछ अटका और टिका है! राजनीति से लेकर शेयर बाज़ार तक सबको बिहार से बोध की प्रतीक्षा है! किसी विधानसभा चुनाव से शेयर बाज़ार इतना चिन्तित होगा, कभी सोचा नहीं था. लेकिन वह इस बार वह बहुत चिन्तित है. इतना कि देश की तीन बड़ी ब्रोकरेज कम्पनियों ने ख़ुद अपनी टीमें बिहार … Continue reading शुभ नहीं हैं 2016 के संकेत!