मुहम्मद शमी या इरफ़ान पठान की बीवी के पहनावों पर फ़ब्तियां कसने वाले मुसलमान हैं? – Shahnawaz Alam

मुहम्मद शमी या इरफ़ान पठान की बीवी के पहनावों पर फ़ब्तियां कसने वाले मुसलमान हैं. भाषा गुंडे-बदमाशों वाली है. बीमार और तालिबानी ज़ेहनियत के लोग हैं. ये मुसलमान हैं और मुसलमानों के बीच रहते हैं. मैंने मुहम्मद शमी और इरफ़ान पठान की वॉल पर जाकर कमेंट्स करने वालों के काउंट्स बार-बार चेक किए हैं. मुझे…

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मध्य प्रदेश सरकार अब सरकारी अस्पतालों में डाक्टरों के साथ ज्योतिषियों को भी बैठाएगी – Himanshu Kumar

आज पढ़ रहा था कि मध्य प्रदेश सरकार अब सरकारी अस्पतालों में डाक्टरों के साथ ज्योतिषियों को भी बैठाएगी जो व्यक्ति के स्वस्थ होने या उसके कर्मों के कारण उसके बीमार होने या दुर्घटनाग्रस्त होने के बारे में अपने ज्योतिष के हिसाब से बताएँगे, यह मूर्खता की पराकाष्ठा है. दूसरी खबर यह है कि सरस्वती…

काँग्रेस+समाजवादी+वामपंथी- रामचंद्र गुहा की ‘फैंटेसी’ में छिपा भविष्य का रास्ता – Pankaj Srivastava ————————————————————–

  इलाहाबाद विश्वविद्यालय के दर्शनशास्त्र विभाग के नीम अंधेर कमरे में पहली बार यह शब्द-पद कान में पड़ा था- अमूर्त प्रत्यय ! वह बीए प्रथम वर्ष की कोई शुरुआती कक्षा थी। विज्ञान के विषयों से इंटरमीडिएट करके आने वाले मेरे जैसे छात्र के लिए इसका ठीक अर्थ समझने में कई साल लग गए। और जब…

फर्रुखाबाद की ट्रेन में मुस्लिम यात्रियों पर हमला एक बार फिर जुनैद काण्ड को दोहराने की कोशिश- रिहाई मंच

  पुलिस ने लचर विवेचना कर पहलू खान के हत्यारोपी को दिलवाई जमानत मोहसिन, अखलाक, अयूब और अब पहलू खान के हत्यारोपियों को जमानत से हत्यारों के हौसले होंगे बुलंद लखनऊ 14 जुलाई 2017। रिहाई मंच ने फर्रुखाबाद की एक ट्रेन में मुस्लिम यात्रियों पर हुए सांप्रदायिक हमले को एक बार फिर यूपी में जुनैद…

आप लोगों ने मोदी जी के मुंह से अब तक इस पर कुछ सुना क्या? – Dilip Khan

  कल अलग गोरखालैंड के आंदोलन को एक महीना हो जाएगा। 29 दिनों से दार्जिलिंग जल रहा है। कई लोग मारे जा चुके हैं। अर्धसैनिक बलों से बात नहीं बनी तो सेना के जवानों को वहां उतारा गया, लेकिन बातचीत की अब तक कोई ठोस पहल नहीं हुई। मान लिया गया कि ये पूरी तरह…

होके मजबूर मुझे उसने भुलाया होगा – Amitaabh Srivastava

देव आनंद ने गाइड के निर्देशन के लिए पहले चेतन आनंद को ही चुना था लेकिन जब दो भाषाओँ में फिल्म बनना शुरू हुई तो तालमेल की कमी दिखने लगी . चेतन आनंद अलग हो गए और गोल्डी यानी विजय आनंद को निर्देशन की कमान मिली. चेतन ने उसी दरम्यान बनायी हक़ीक़त , जो गाइड…