No cap on corporate funds to parties, suggest a way out, Govt tells Opposition

Parliament Thursday approved the Finance Bill, rejecting five amendments proposed a day earlier by Rajya Sabha on curtailing more powers to taxmen and capping corporate donations to political parties. The amendments, forced by the Opposition in Rajya Sabha where the government lacked majority, were negated by Lok Sabha and the Bill passed, completing the budgetary exercise for 2017-18. Defending the government’s stand to reject the … Continue reading No cap on corporate funds to parties, suggest a way out, Govt tells Opposition

Vimal Thorat speaks about Dalit Feminism with Teesta Setalvad

Vimal Thorat, Convenor of the National Campaign for Dalit Human Rights (NCDHR) and a former professor of Hindi at the Indira Gandhi National Open University (IGNOU), in this exclusive and detailed interview to Teesta Setalvad speaks of her decades long struggle to ensure that Dalit literature from seven Indian languages (translated into Hindi) is available to MA Part II students at the IGNOU. The interview … Continue reading Vimal Thorat speaks about Dalit Feminism with Teesta Setalvad

जला कर मारने, गोली से उड़ा देने या नरसंहार के लिए ‘असहिष्‍णुता’ (इनटोलरेंस) सही शब्‍द नहीं है – अरुंधति राय

हालांकि, मैं नहीं मानती कि कोई अवॉर्ड हमारे काम को आंकने का सही पैमाना है। मैं लौटाए गए अवॉर्ड्स की सूची में 1989 में प्राप्‍त नेशनल अवॉर्ड (बेस्‍ट स्‍क्रीनप्‍ले के लिए) को भी शामिल करती हूं। मैं यह साफ कर देना चाहती हूं कि मैं यह अवॉर्ड इसलिए नहीं लौटा रही क्‍योंकि मैं उस बात से आहत हूं जिसे ‘बढ़ती कट्टरता’ कहा जा रहा है … Continue reading जला कर मारने, गोली से उड़ा देने या नरसंहार के लिए ‘असहिष्‍णुता’ (इनटोलरेंस) सही शब्‍द नहीं है – अरुंधति राय

सरकार या ईवेंट मैनेजमेंट? – रवीश कुमार

 सौजन्य – एनडीटीवी इंडिया देश काम से चलता है, लेकिन पिछले कई सालों से सरकारें आंकड़ों से काम चला रही हैं। इन आंकड़ों में एक और आंकड़ा शामिल करना चाहिए, बयानों का आंकड़ा। आंकड़े कि कब, किसने, कहां पर और किस तरह का बयान दिया, आपत्तिजनक बयान कौन से थे, किन बयानों का सबने स्वागत किया, किन बयानों पर विवाद हुआ, कौन से बयान वापस … Continue reading सरकार या ईवेंट मैनेजमेंट? – रवीश कुमार

प्यारे प्रधानमंत्री जी, आपके भाषण से भभूत तक – पीएम को पाती

सेवा में, प्रिय विदेश , परिधान, प्रधान-सेवक, प्रधान मंत्री, भारतीय जनता पार्टी, आर एस एस, भारत सरकार, इंदरप्रस्थ दिल्ली। विषय – आपके भाषण से भरोसे, जाति से जेल, सेवा से सरकार और भाषा से भभूत तक के सम्बंध में महोदय, आपको प्रधानमंत्री कहना चाहता हूं तो थोड़ा लम्बा हो जाता है, पीएम कहता हूं तो बहुत ही छोटा लगता है फिर प्राइम मिनिस्टर कहता हूं, … Continue reading प्यारे प्रधानमंत्री जी, आपके भाषण से भभूत तक – पीएम को पाती

यह देश है कि भीड़? – कविता

भीड़ के ख़तरों को तुम नहीं जानते भीड़ सुनती है सिर्फ लाउडस्पीकर को भीड़ सच नहीं सुनती भीड़ सुन नहीं सकती कैसे सुन सकता है कोई साफ-साफ किसी शोर को भीड़ आती है किसी बांध के टूटने के सैलाब सी भीड़ विपदा होती है जो गिर पड़ती है मनुष्यता पर जिसे रोका जा सकता है सिर्फ मनुष्य हो कर भीड़ बड़ी कारगर है मंदिरों-मस्जिदों-गिरजों-गुरुद्वारों में … Continue reading यह देश है कि भीड़? – कविता

जनसंहार के मामलों पर उदासीनता हमारी राष्ट्रीय संस्कृति हो गई है – तीस्ता सेतलवाड़ (साक्षात्कार)

कुछ लोग तीस्ता सेतलवाड़ को बीजेपी की आंख का कांटा मानते हैं; कुछ एक ऐसी असुविधा, जो किसी भी तरह 2002 के गुजरात दंगों को भूलने नहीं देंगी। और कई लोग भी हैं, जो उनको एक निडर सामाजिक कार्यकर्ता मानते हैं, जो लगातार न्याय और धर्मनिरपेक्षता के मोर्चे पर डटी हैं। लेकिन तथ्य यह है कि आज गुजरात दंगों, उसके पीड़ितो और उसके पीछे की … Continue reading जनसंहार के मामलों पर उदासीनता हमारी राष्ट्रीय संस्कृति हो गई है – तीस्ता सेतलवाड़ (साक्षात्कार)

छत्तीसगढ़ का दंतेवाड़ा जिला

छत्तीसगढ़ का दंतेवाड़ा जिला सरकार आदिवासियों को मार कर आदिवासियों की ज़मीनें बड़े उद्योगपतियों के लिए का काम कर रही है आदिवासियों की हत्याओं और बलात्कारों का काम करने के लिए इस काम में बदमाश पुलिस अधिकारियों को लगाया गया है . ज़मीनें छीनने के लिए छत्तीसगढ़ का मुख्यमंत्री रमन सिंह और प्रधान मंत्री मोदी दोनों मिलकर आदिवासियों की हत्याओं , आदिवासी औरतों के बलात्कार … Continue reading छत्तीसगढ़ का दंतेवाड़ा जिला

The History of May Day – Alexander Trachtenberg

The Fight for the Shorter Workday The origin of May Day is indissolubly bound up with the struggle for the shorter workday – a demand of major political significance for the working class. This struggle is manifest almost from the beginning of the factory system in the United States. Although the demand for higher wages appears to be the most prevalent cause for the early … Continue reading The History of May Day – Alexander Trachtenberg

मैं नास्तिक क्यों हूँ? – भगत सिंह

यह लेख भगत सिंह ने जेल में रहते हुए लिखा था और यह 27 सितम्बर 1931 को लाहौर के अखबार “ द पीपल “ में प्रकाशित हुआ । इस लेख में भगतसिंह ने ईश्वर कि उपस्थिति पर अनेक तर्कपूर्ण सवाल खड़े किये हैं और इस संसार के निर्माण , मनुष्य के जन्म , मनुष्य के मन में ईश्वर की कल्पना के साथ साथ संसार में … Continue reading मैं नास्तिक क्यों हूँ? – भगत सिंह