हम इतने असहज क्यों है सेक्स को लेकर ? -Vishwa Deepak

संदीप के मामले में जो प्रतिक्रियाएं आई हैं, वो बताती हैं कि हमारा समाज कितना पाखंडी है. ‘नैतिकता’ का ढोल पीटने वालों का दिमाग खोलकर देखिए – वहां सेक्स का कल्पना सागर लहराता हुआ मिलेगा. न्यूज़ चैनलों की नैतिकता और इसके संपादकों का हाहाकारी विलाप इसी पाखंड का हिस्सा है. हर न्यूज चैनल में आपको कम से कम 10 लोग ऐसे मिल जाएंगे जिनके आगे … Continue reading हम इतने असहज क्यों है सेक्स को लेकर ? -Vishwa Deepak

छदम नैतिकता और हम – किशोर

पिछले दिनों “नैतिकता” का पाठ पढ़ाने के नाम पर मुंबई पुलिस ने होटलों में छापा मारा चालीस  जोड़ो को हिरासत में लेकर उन्हें तिरस्कृत किया, कई घंटे हिरासत में रखा और जुर्माना वसूल कर के ही उन हे रिहा किया. साथ ही उन्हें अपने घरवालों को फ़ोन करने करने के लिए भी मजबूर किया गया. गौरे तलब हैं कि इन होटलों में एक भी वह … Continue reading छदम नैतिकता और हम – किशोर

जनसंहार के मामलों पर उदासीनता हमारी राष्ट्रीय संस्कृति हो गई है – तीस्ता सेतलवाड़ (साक्षात्कार)

कुछ लोग तीस्ता सेतलवाड़ को बीजेपी की आंख का कांटा मानते हैं; कुछ एक ऐसी असुविधा, जो किसी भी तरह 2002 के गुजरात दंगों को भूलने नहीं देंगी। और कई लोग भी हैं, जो उनको एक निडर सामाजिक कार्यकर्ता मानते हैं, जो लगातार न्याय और धर्मनिरपेक्षता के मोर्चे पर डटी हैं। लेकिन तथ्य यह है कि आज गुजरात दंगों, उसके पीड़ितो और उसके पीछे की … Continue reading जनसंहार के मामलों पर उदासीनता हमारी राष्ट्रीय संस्कृति हो गई है – तीस्ता सेतलवाड़ (साक्षात्कार)

The long road ahead – Shaleen Rakesh

On 11 December 2013, the streets outside the Supreme Court of India thronged with a dazed crowd, hugging, sobbing and not quite sure what had happened. Inside the hushed courtroom, the judges had just passed a devastating ruling. Lesbians, gays, bisexual, transgender (LGBT) in India had once again been labelled as criminals. Section 377, the 149-year-old colonial law that banned gay sex, had been upheld … Continue reading The long road ahead – Shaleen Rakesh

Apex Court verdict re-criminalizing consensual same sex relationships unconstitutional and inhuman

NAPM demands legal recognition of the natural right to life and love of lakhs of gender diverse individuals New Delhi, December 14 : As lakhs of individuals and groups across the country, celebrated the 4th anniversary of the historical judgement by Justice (Retd). A.P. Shah and Justice (Retd). Muralidharan of the Delhi High Court, recognizing the natural right to life and life of gender diverse … Continue reading Apex Court verdict re-criminalizing consensual same sex relationships unconstitutional and inhuman

Life for Gay People After Supreme Court’s Ban

This post is commentary. I have been judged and pronounced guilty by a group of people who know nothing of me. My crime is wanting to love, to live and exist with dignity and equality without fear. The Supreme Court’s ugly, unfair judgment Wednesday tells me that my love for another human being is illegal. The Constitution gave us the right to be equal. In … Continue reading Life for Gay People After Supreme Court’s Ban