क्या है नेहरू के पुरखों को मुसलमान बताने का मक़सद और असलियत !

सोशल मीडिया की बढ़ती धमक के साथ प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू की वल्दियत को लेकर सवाल उठाए जाने लगे। विकीपीडिया में संपादन की खुली सुविधा का लाभ यह हुआ कि उनके पितामहों में किसी गयासुद्दीन गाज़ी का नाम जोड़ दिया गया और फिर उसे ‘प्रमाण ‘बतौर पेश किया जाने लगे। बाद में यह झूठ साबित हुआ और जिस कंप्यूटर से ऐसा किया गया वह पीएम मोदी … Continue reading क्या है नेहरू के पुरखों को मुसलमान बताने का मक़सद और असलियत !

#एबीपीन्यूज़ सम्पादक Milind Khandekar से इस्तीफ़ा ले लिया गया , Abhisar Sharma को छुट्टी पर भेज दिया गया, Punya Prasun Bajpai हटा दिये गये – QW Naqvi

#एबीपीन्यूज़ में पिछले 24 घंटों में जो कुछ हो गया, वह भयानक है. और उससे भी भयानक है वह चुप्पी जो फ़ेसबुक और ट्विटर पर छायी हुई है. भयानक है वह चुप्पी जो मीडिया संगठनों में छायी हुई है.   मीडिया की नाक में नकेल डाले जाने का जो सिलसिला पिछले कुछ सालों से नियोजित रूप से चलता आ रहा है, यह उसका एक मदान्ध … Continue reading #एबीपीन्यूज़ सम्पादक Milind Khandekar से इस्तीफ़ा ले लिया गया , Abhisar Sharma को छुट्टी पर भेज दिया गया, Punya Prasun Bajpai हटा दिये गये – QW Naqvi

सार्वजनिक संस्थाओं को बेचने पर आमादा सरकारों से पूछा जाना चाहिए कि वो हैं किस लिए ? सिर्फ दलाली खाने के लिए? – Rakesh Kayasth

सरकारी तंत्र यानी नकारापन। प्राइवेट सेक्टर यानी अच्छी सर्विस और एकांउटिबिलिटी। यह एक आम धारणा है, जो लगभग हर भारतीय के मन में बैठी हुई है या यूं कहे बैठा दी गई है। लेकिन यह धारणा हर दिन खंडित होती है। किस तरह उसकी एक छोटी केस स्टडी आपके सामने रख रहा हूं। मेरे पड़ोसी ने एक ऐसे प्राइवेट बैंक से होम लोन लिया था, … Continue reading सार्वजनिक संस्थाओं को बेचने पर आमादा सरकारों से पूछा जाना चाहिए कि वो हैं किस लिए ? सिर्फ दलाली खाने के लिए? – Rakesh Kayasth

राजनीतिक ताकत खैरात में नहीं मिलती – Rakesh Kayasth

राजनीतिक शब्दावली में जिसे लिबरल डेमोक्रेट कहते हैं, मैं उसी तरह का आदमी हूं। वामपंथियों और दक्षिणपंथियों के संपर्क में बराबर-बराबर रहा हूं, इसलिए झुकाव किधर है, यह तय कर पाना मुश्किल है। बहुत सी सामाजिक परंपराओं में आस्था है। धर्म भी मानता हूं, इसलिए परंपरागत अर्थ में आप मुझे दक्षिणपंथ की तरफ झुका आदमी समझ सकते हैं। मैं उन लोगो में नहीं हूं जिन्हे … Continue reading राजनीतिक ताकत खैरात में नहीं मिलती – Rakesh Kayasth

Kangana know your place-Deepak Venkatesha

Kangana & Anurag are a lesson for all of us. We are the “Outsiders”. We need to keep our head low, hang low and not really be seen. The ‘perks of being a wallflower’ is what we need to learn. Rangoon & Bombay Velvet were not bad films. They have been classified as the worst because Icarus (Read Outsiders) tried to get too close to … Continue reading Kangana know your place-Deepak Venkatesha

गोडसे@गांधी.कॉम – Himanshu Kumar

असगर वजाहत का लिखा हुआ और टॉम आल्टर के ग्रूप द्वारा खेला गया नाटक देखा, नेहरु की भूमिका सरदार फिल्म में नेहरु बने बेंजामिन गिलानी ने ही निभाई, मेरे साथ बैठे एक युवा मित्र ने कहा, यह तो बिल्कुल असली नेहरु लगते हैं ! मैंने उनको बताया कि सरदार फिल्म में नेहरु के रूप में आप सब ने इन्ही को देखा है इस लिये आप … Continue reading गोडसे@गांधी.कॉम – Himanshu Kumar

Gandhi, Aligarh and two minutes of silence- Sehba Imam

I grew up in a fanatically secular home, with no gods but lots of festivals… Still the idea of God and reverence was all around – so, as a child I wasn’t clear who stood for what but knew that some figures were special – Ram, Muhammad, Christ, Gandhi and Lenin, they had to be spoken of with lot of respect and followed as an … Continue reading Gandhi, Aligarh and two minutes of silence- Sehba Imam