जनसंहार के मामलों पर उदासीनता हमारी राष्ट्रीय संस्कृति हो गई है – तीस्ता सेतलवाड़ (साक्षात्कार)

कुछ लोग तीस्ता सेतलवाड़ को बीजेपी की आंख का कांटा मानते हैं; कुछ एक ऐसी असुविधा, जो किसी भी तरह 2002 के गुजरात दंगों को भूलने नहीं देंगी। और कई लोग भी हैं, जो उनको एक निडर सामाजिक कार्यकर्ता मानते हैं, जो लगातार न्याय और धर्मनिरपेक्षता के मोर्चे पर डटी हैं। लेकिन तथ्य यह है कि आज गुजरात दंगों, उसके पीड़ितो और उसके पीछे की … Continue reading जनसंहार के मामलों पर उदासीनता हमारी राष्ट्रीय संस्कृति हो गई है – तीस्ता सेतलवाड़ (साक्षात्कार)

Communalism and History – Romila Thapar

Based on a talk by Professor Romila Thapar at the Khandala workshop organised by Vikas Adhyayan Kendra Why is it that historians in particular are so concerned about communal ideology, the ideology of the communalists? Why is it that economist, sociologists and others who are in the social science: are less concerned while historians are constantly debating the ideology that is put out by communalism? … Continue reading Communalism and History – Romila Thapar