दादरी का अख़लाक़ – राजेश जोशी की कविता

“दादरी का अख़लाक़” हर हत्या के बाद ख़ामोश हो जाते हैं हत्यारे और उनके मित्रगण. उनके दाँतों के बीच फँसे रहते हैं ताज़ा माँस के गुलाबी रेशे, रक्त की कुछ बूँदें भी चिपकी होती हैं होंठों के आसपास, पर आँखें भावशून्य हो जाती हैं जैसे चकित सी होती हों धरती पर निश्चल पड़ी कुचली-नुची मृत मानव देह को देखकर हत्या के बाद हत्यारे भूल जाते … Continue reading दादरी का अख़लाक़ – राजेश जोशी की कविता

सरकार या ईवेंट मैनेजमेंट? – रवीश कुमार

 सौजन्य – एनडीटीवी इंडिया देश काम से चलता है, लेकिन पिछले कई सालों से सरकारें आंकड़ों से काम चला रही हैं। इन आंकड़ों में एक और आंकड़ा शामिल करना चाहिए, बयानों का आंकड़ा। आंकड़े कि कब, किसने, कहां पर और किस तरह का बयान दिया, आपत्तिजनक बयान कौन से थे, किन बयानों का सबने स्वागत किया, किन बयानों पर विवाद हुआ, कौन से बयान वापस … Continue reading सरकार या ईवेंट मैनेजमेंट? – रवीश कुमार

सालगिरह मुबारक पाकिस्तान…

बचपन से 15 अगस्त को स्कूल में होता था…बड़ा हुआ तो कॉलेज में जाने लगा…या फिर आस पास के किसी स्कूल या पिता जी के दफ्तर में…नौकरी में आया तो हर बार 15 अगस्त को दफ्तर में रहा…सुबह से देशभक्ति के नाम के झूठे नारे टीवी पर चलवाता रहा…लाल किले से किसी ने किसी धोखेबाज़ की ठगी को लाइव दिखवाता रहा…भाषणों का विश्लेषण करने के … Continue reading सालगिरह मुबारक पाकिस्तान…

प्यारे प्रधानमंत्री जी, आपके भाषण से भभूत तक – पीएम को पाती

सेवा में, प्रिय विदेश , परिधान, प्रधान-सेवक, प्रधान मंत्री, भारतीय जनता पार्टी, आर एस एस, भारत सरकार, इंदरप्रस्थ दिल्ली। विषय – आपके भाषण से भरोसे, जाति से जेल, सेवा से सरकार और भाषा से भभूत तक के सम्बंध में महोदय, आपको प्रधानमंत्री कहना चाहता हूं तो थोड़ा लम्बा हो जाता है, पीएम कहता हूं तो बहुत ही छोटा लगता है फिर प्राइम मिनिस्टर कहता हूं, … Continue reading प्यारे प्रधानमंत्री जी, आपके भाषण से भभूत तक – पीएम को पाती

जनसंहार के मामलों पर उदासीनता हमारी राष्ट्रीय संस्कृति हो गई है – तीस्ता सेतलवाड़ (साक्षात्कार)

कुछ लोग तीस्ता सेतलवाड़ को बीजेपी की आंख का कांटा मानते हैं; कुछ एक ऐसी असुविधा, जो किसी भी तरह 2002 के गुजरात दंगों को भूलने नहीं देंगी। और कई लोग भी हैं, जो उनको एक निडर सामाजिक कार्यकर्ता मानते हैं, जो लगातार न्याय और धर्मनिरपेक्षता के मोर्चे पर डटी हैं। लेकिन तथ्य यह है कि आज गुजरात दंगों, उसके पीड़ितो और उसके पीछे की … Continue reading जनसंहार के मामलों पर उदासीनता हमारी राष्ट्रीय संस्कृति हो गई है – तीस्ता सेतलवाड़ (साक्षात्कार)

मैं नास्तिक क्यों हूँ? – भगत सिंह

यह लेख भगत सिंह ने जेल में रहते हुए लिखा था और यह 27 सितम्बर 1931 को लाहौर के अखबार “ द पीपल “ में प्रकाशित हुआ । इस लेख में भगतसिंह ने ईश्वर कि उपस्थिति पर अनेक तर्कपूर्ण सवाल खड़े किये हैं और इस संसार के निर्माण , मनुष्य के जन्म , मनुष्य के मन में ईश्वर की कल्पना के साथ साथ संसार में … Continue reading मैं नास्तिक क्यों हूँ? – भगत सिंह

OPEN LETTER TO ARNAB GOSWAMI, EDITOR-IN-CHIEF, TIMES NOW

Dear Mr. Arnab Goswami,     We, the undersigned, who have on many occasions participated in the 9:00 p.m. News Hour programme on Times Now, anchored by you , wish to raise concerns about the shrinking space in this programme for reasoned debate and the manner in which it has been used to demonize people’s movements and civil liberties activists.   On 17th  and 18th … Continue reading OPEN LETTER TO ARNAB GOSWAMI, EDITOR-IN-CHIEF, TIMES NOW