Bob Dylan on Winning the Nobel for Literature

Read Dylan’s speech, which was read by United States Ambassador to Sweden Azita Raji, below: Good evening, everyone. I extend my warmest greetings to the members of the Swedish Academy and to all of the other distinguished guests in attendance tonight. I’m sorry I can’t be with you in person, but please know that I am most definitely with you in spirit and honored to … Continue reading Bob Dylan on Winning the Nobel for Literature

पचास दिन पचास रात – बोधिसत्व

  यह बड़ी पुरानी बात है कोसल का एक राजा था एक दिन राजा ने उद्बोधन किया … प्रिय प्रजाजनों प्रिय संत जनों राष्ट्र हित में बस पचास दिन और पचास रात जो देता हूँ वह दुख सहन करो वह राजा था इसलिए उद्बोधन कर सकता था दुख सुख सब कुछ दे सकता था भक्त प्रजा ने भजन किया बस पचास दिन और पचास रात … Continue reading पचास दिन पचास रात – बोधिसत्व

आर्यवर्त की सजग सरकार-बोधिसत्व

  तभी अचानक सावन के दिव्य महीने में सर्वथा नूतन सरकार ने … एक नया नवेला नियम बनाया घर में दफ्तर में बाजार में रात दिन दोपहर मे नदी नाले नहर में डूब कर या खा कर जहर जो जान गवांएगा ऐसा आत्म हत्यारा देश के लिए शहीद माना जाएगा ऐसे आत्म बलिदानियों की भव्य समाधि बनेगी नगर चौक पर मूर्ति बिठाई जाएगी जन कवियों … Continue reading आर्यवर्त की सजग सरकार-बोधिसत्व

सरकार के दो और बड़े फैसले हंसी और विलाप टैक्स -Bodhi Sattva

आज जो भी दिन दिनांक हो इसे सुदिन शुभ मान कर सरकार ने दो बड़े मार्मिक निर्णय लिए हैं….इसके लिए सरकार ने एक नए महकमें की स्थापना की है…जिसका नाम हंसी विलाप टैक्स विभाग रखा गया है.. आज और अभी से जो भी नर नारी बालक वृद्ध किसी भी स्थिति में रोता हुआ पाया जाएगा उस पर देश द्रोह का मुकदमा चलेगा, रोना अब एक … Continue reading सरकार के दो और बड़े फैसले हंसी और विलाप टैक्स -Bodhi Sattva

पंडितजी के रौशनदान से लटकता प्रचारक- Rakesh Kayasth

प्रिय प्रचारक, तुम हो राष्ट्र तारक। करते हो देश की बड़ी भलाई, लेकिन एक बात अब तक समझ नहीं आई। इतिहास के कूड़ेदान में क्यों भटक रहे हो। बावन साल हो गये नेहरू को गये, लेकिन अब भी तुम तीनमूर्ति का रौशनदान पकड़े लटक रहे हो! माना हर बेडरूम में झांकना तुम्हारा अधिकार है। लेकिन आखिर एक मरे हुए आदमी से तुम्हे क्यों इस कदर … Continue reading पंडितजी के रौशनदान से लटकता प्रचारक- Rakesh Kayasth

आज के समय में प्रेमचंद कि प्रासंगिकता –किशोर

  आज मुंशी प्रेमचंद की सालगिरह है और यह पोस्ट खासकर उस युवा पीढ़ी के लिए है जिसे शायद ही उनकी रचनाओं को पढने का मौका मिले और यह जरूरी है कि किसी भी हाल में उस परंपरा को जिन्दा रखना जरूरी है जो प्रेमचंद ने शुरू की थी प्रेमचंद के बारे में कुछ ऐसे तथ्य जो ज्यादा लोगों को पता नहीं है हिंदी के … Continue reading आज के समय में प्रेमचंद कि प्रासंगिकता –किशोर

सुबह सवेरे – Neelabh Ashk

सुबह सवेरे – 1 इधर कुछ दिनों से, जब से हमने लम्बी बीमारी के बाद किसी क़दर सेहतयाब होने की तरफ़ क़दम बढ़ाना शुरू किया है, हम अपने मकान के चौबारे में कुर्सी पर बैठ कर मंजन करते हैं. वक़्त चार का भी हो सकता है, इससे कुछ आगे-पीछे का भी. फिर उठ कर ज़िन्दगी के कारोबार शुरू करने के लिए हिम्मत बांधते हुए हम … Continue reading सुबह सवेरे – Neelabh Ashk