पंडितजी के रौशनदान से लटकता प्रचारक- Rakesh Kayasth

प्रिय प्रचारक, तुम हो राष्ट्र तारक। करते हो देश की बड़ी भलाई, लेकिन एक बात अब तक समझ नहीं आई। इतिहास के कूड़ेदान में क्यों भटक रहे हो। बावन साल हो गये नेहरू को गये, लेकिन अब भी तुम तीनमूर्ति का रौशनदान पकड़े लटक रहे हो! माना हर बेडरूम में झांकना तुम्हारा अधिकार है। लेकिन आखिर एक मरे हुए आदमी से तुम्हे क्यों इस कदर … Continue reading पंडितजी के रौशनदान से लटकता प्रचारक- Rakesh Kayasth

आज के समय में प्रेमचंद कि प्रासंगिकता –किशोर

  आज मुंशी प्रेमचंद की सालगिरह है और यह पोस्ट खासकर उस युवा पीढ़ी के लिए है जिसे शायद ही उनकी रचनाओं को पढने का मौका मिले और यह जरूरी है कि किसी भी हाल में उस परंपरा को जिन्दा रखना जरूरी है जो प्रेमचंद ने शुरू की थी प्रेमचंद के बारे में कुछ ऐसे तथ्य जो ज्यादा लोगों को पता नहीं है हिंदी के … Continue reading आज के समय में प्रेमचंद कि प्रासंगिकता –किशोर

सुबह सवेरे – Neelabh Ashk

सुबह सवेरे – 1 इधर कुछ दिनों से, जब से हमने लम्बी बीमारी के बाद किसी क़दर सेहतयाब होने की तरफ़ क़दम बढ़ाना शुरू किया है, हम अपने मकान के चौबारे में कुर्सी पर बैठ कर मंजन करते हैं. वक़्त चार का भी हो सकता है, इससे कुछ आगे-पीछे का भी. फिर उठ कर ज़िन्दगी के कारोबार शुरू करने के लिए हिम्मत बांधते हुए हम … Continue reading सुबह सवेरे – Neelabh Ashk

प्रायश्चित -Neelabh Ashk

इस माफ़ीनामे को शुरू करने से पहले ही मुझे शिद्दत से इस बात का एहसास है कि इसे सही तरह से लिख कर पेश करने में ख़ासी दुश्वारी होने वाली है. कुछ तो बातें ही ऐसी हैं कि काफ़ी उलझी हुई हैं और ऊपर से इसका ताल्लुक़ किसी एक व्यक्ति से नहीं है, बल्कि यह एक समूचे सम्मानित परिवार के प्रति किये गये अशोभनीय व्यवहार … Continue reading प्रायश्चित -Neelabh Ashk