नेहरू हर महीने नेताजी सुभाष की बेटी को आर्थिक मदद भेजते रहे, पर विज्ञापन नहीं किया!

प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने ‘डिस्कवरी ऑफ़ इंडिया’ जैसी किताब लिखकर इतिहास को भले ही समृद्ध किया हो, लेकिन लोगों में इतिहास के प्रति दिलचस्पी तो मौजूदा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ही जगाई है। इसके लिए देश की नौजवान पीढ़ी को ख़ासतौर पर उनका आभारी होना चाहिए। वे अपने भाषणों में अगर यक़ीन से परे दावों की मुसलसल धार न छोड़ते तो लोग इतिहास के … Continue reading नेहरू हर महीने नेताजी सुभाष की बेटी को आर्थिक मदद भेजते रहे, पर विज्ञापन नहीं किया!

‘Rohingyas have captured the interest of the west as they are backward and liberal muslims.”

‘Rohingyas Issue Isn’t Political In India’ Ravi Hemadri, DAJI Director, talks about Rohingyas in India, lack of media coverage and resettlement issues. Hansa Malhotra,  Geetika Mantri INTERVIEWS Originally from Myanmar, the ‘boat people’ Rohingyas have been recognized by human rights organizations across the world as one of the most heavily persecuted minorities due to the systemic violence and discrimination they have faced in their own … Continue reading ‘Rohingyas have captured the interest of the west as they are backward and liberal muslims.”

We march because all immigrants must be free

With the nationwide day of action on June 30, Christopher Baum explains how Trump’s cruel policies are an intensification of those initiated by his predecessors.   MASSES OF people across the country will mobilize in a cry of protest on Saturday, June 30, as the border nightmare orchestrated by Donald Trump and his administration continues with no end in sight. More than a week after … Continue reading We march because all immigrants must be free

The pro-immigrant majority in the streets

Alan Maass rounds up reports from contributors around the country who tell what happened on the June 30 day of mobilizations to oppose Trump’s anti-immigrant hate AFTER A week that reminded everyone just how much damage Trump and the right wing can do — from the continuing nightmare for migrant families at the border to the Supreme Court’s reactionary decisions and the new opening for … Continue reading The pro-immigrant majority in the streets

আমেরিকার অবস্থা প্যাথেটিক -Partha Banerjee

আমেরিকার অবস্থা যে কতটা প্যাথেটিক, সেটা আমেরিকায় যারা বহুকাল বসবাস করেনি, বা বসবাস করেও রাজনীতি অর্থনীতি সমাজনীতির জগতে প্রত্যক্ষভাবে কাজ করেনি, তারা বুঝতে পারবেনা। আমেরিকানরাও মোটেই শুনতে রাজি নয় যে দেশটা খুবই পিছিয়ে পড়া। তারা বহুকাল ধরে একটা ধারণা বদ্ধমুলভাবে ধরে রেখেছে যে এই দেশটা পৃথিবীর শ্রেষ্ঠ দেশ। কীসে শ্রেষ্ঠ, জিজ্ঞেস করলে তারা বলবে, শ্রেষ্ঠ ধনী দেশ। বলবে, শ্রেষ্ঠ স্বাধীনতার দেশ। বলবে, শ্রেষ্ঠ মুক্তচিন্তার দেশ। … Continue reading আমেরিকার অবস্থা প্যাথেটিক -Partha Banerjee

পৃথিবীর সব দেশ মিলিয়ে টোটাল যত বন্দী জেলে পচছে, আমেরিকাতে তার এক চতুর্থাংশ পচছে, আপনারা কী বলবেন? – Partha Banerjee

আমি যদি আপনাদের বলি, সারা পৃথিবীর সব দেশ মিলিয়ে টোটাল যত বন্দী জেলে পচছে, আমেরিকাতে তার এক চতুর্থাংশ পচছে, আপনারা কী বলবেন? (১) পাগল নাকি? (২) চীন, রাশিয়া, সৌদি আরব এসব জায়গায় আরো বেশি আছে, আমরা জানতে পারিনা, (৩) আপনার যখন আমেরিকা এতো অপছন্দ, ওখানে পড়ে আছেন কেন? (৪) ঐসব “কালুয়া” (Bengali slang for African-Americans) আর “লেড়ে” (slang for Muslims), ওদের জেলে থাকাই দরকার। — … Continue reading পৃথিবীর সব দেশ মিলিয়ে টোটাল যত বন্দী জেলে পচছে, আমেরিকাতে তার এক চতুর্থাংশ পচছে, আপনারা কী বলবেন? – Partha Banerjee

गांधी, चार्ली, चर्चिल और मशीन -2 (Nitin Thakur)

चार्ली चैप्लिन महात्मा गांधी से मिलना चाहते थे जिसके लिए कैनिंग टाउन में डॉक्टर चुन्नीलाल कतियाल के यहाँ 22 सितम्बर 1931 की शाम का वक्त तय हुआ। खुद चैप्लिन ने इस रोचक मुलाकात को आत्मकथा में सहेजा है। उस वक्त का एक फोटो रिकॉर्ड्स में मिलता है जिसमें गांधी गाड़ी से बाहर आ रहे हैं और उन्हें लोगों ने चारों तरफ से घेर रखा है। … Continue reading गांधी, चार्ली, चर्चिल और मशीन -2 (Nitin Thakur)