इंदिरा दुर्गा और नेहरू खलनायक क्यों? – Rakesh Kayasth

  देश के इतिहास में संघियों के पिटने और जेल जाने की अगर कोई वाकया है, तो वह सिर्फ इमरजेंसी के दौर का है। लिखित माफी की भी कुछ कहानियां हैं। लेकिन यह सच है कि समाजवादियों के साथ संघियों ने भी इमरजेंसी के दौरान इंदिरा सरकार की प्रताड़ना सही। इतिहास बोध आजकल एक विलुप्तप्राय चीज़ है। लेकिन पुराने पत्रकारों से बात कीजिये तो पता … Continue reading इंदिरा दुर्गा और नेहरू खलनायक क्यों? – Rakesh Kayasth

गांधी, चार्ली, चर्चिल और मशीन -2 (Nitin Thakur)

चार्ली चैप्लिन महात्मा गांधी से मिलना चाहते थे जिसके लिए कैनिंग टाउन में डॉक्टर चुन्नीलाल कतियाल के यहाँ 22 सितम्बर 1931 की शाम का वक्त तय हुआ। खुद चैप्लिन ने इस रोचक मुलाकात को आत्मकथा में सहेजा है। उस वक्त का एक फोटो रिकॉर्ड्स में मिलता है जिसमें गांधी गाड़ी से बाहर आ रहे हैं और उन्हें लोगों ने चारों तरफ से घेर रखा है। … Continue reading गांधी, चार्ली, चर्चिल और मशीन -2 (Nitin Thakur)

दादरी का अख़लाक़ – राजेश जोशी की कविता

“दादरी का अख़लाक़” हर हत्या के बाद ख़ामोश हो जाते हैं हत्यारे और उनके मित्रगण. उनके दाँतों के बीच फँसे रहते हैं ताज़ा माँस के गुलाबी रेशे, रक्त की कुछ बूँदें भी चिपकी होती हैं होंठों के आसपास, पर आँखें भावशून्य हो जाती हैं जैसे चकित सी होती हों धरती पर निश्चल पड़ी कुचली-नुची मृत मानव देह को देखकर हत्या के बाद हत्यारे भूल जाते … Continue reading दादरी का अख़लाक़ – राजेश जोशी की कविता

प्यारे प्रधानमंत्री जी, आपके भाषण से भभूत तक – पीएम को पाती

सेवा में, प्रिय विदेश , परिधान, प्रधान-सेवक, प्रधान मंत्री, भारतीय जनता पार्टी, आर एस एस, भारत सरकार, इंदरप्रस्थ दिल्ली। विषय – आपके भाषण से भरोसे, जाति से जेल, सेवा से सरकार और भाषा से भभूत तक के सम्बंध में महोदय, आपको प्रधानमंत्री कहना चाहता हूं तो थोड़ा लम्बा हो जाता है, पीएम कहता हूं तो बहुत ही छोटा लगता है फिर प्राइम मिनिस्टर कहता हूं, … Continue reading प्यारे प्रधानमंत्री जी, आपके भाषण से भभूत तक – पीएम को पाती